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रविवार के पवित्र मिस्सा में आमतौर पर बाइबिल के तीन पाठ क्यों पढ़े जाते हैं?

12 अक्टूबर 2026: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि रविवार की पवित्र मिस्सा में आमतौर पर सुसमाचार से पहले बाइबिल के तीन पाठ पढ़े जाते हैं? ये पाठ बाइबिल के बिल्कुल अलग-अलग भागों से लिए गए हो सकते हैं, फिर भी वचन की धर्मविधि (Liturgy of the Word) के एक ही समारोह में उन्हें एक साथ प्रस्तुत किया जाता है। इसके पीछे एक विशेष कारण है।


रोमन रीति की रविवार की मिस्सा में वचन की धर्मविधि के दौरान सामान्यतः बाइबिल के तीन पाठ होते हैं—पहला पुराने विधान से, दूसरा प्रेरितों के लेखों से और तीसरा सुसमाचार से। ये तीनों मिलकर विश्वासियों को परमेश्वर की मुक्ति की योजना की निरंतरता को समझने में सहायता करते हैं, जो यीशु मसीह में अपनी पूर्णता तक पहुँचती है।


तीन पाठ—मुक्ति की एक ही कहानी

पहला पाठ सामान्यतः पुराने विधान से लिया जाता है और अक्सर किसी भविष्यवक्ता की पुस्तक से होता है। इसे प्रायः सुसमाचार को ध्यान में रखते हुए चुना जाता है। इसमें ऐसी प्रतिज्ञा, प्रतीक या विषय प्रस्तुत किया जा सकता है, जिसकी पूर्णता मसीह में दिखाई देती है।


दूसरा पाठ प्रेरितों के किसी लेख से लिया जाता है—आमतौर पर प्रेरितों के पत्रों में से, हालांकि कभी-कभी यह प्रेरित चरित या प्रकाशितवाक्य की पुस्तक से भी लिया जा सकता है। पहले पाठ के विपरीत, इसे सामान्यतः क्रमिक या अर्ध-निरंतर पद्धति (semi-continuous sequence) से पढ़ा जाता है। इसका अर्थ है कि इसे हमेशा अन्य पाठों के साथ सीधे विषयगत संबंध के आधार पर नहीं चुना जाता, हालांकि कई बार इनके बीच सुंदर और अर्थपूर्ण संबंध दिखाई देता है।


इसके बाद आता है सुसमाचार।


सुसमाचार वचन की धर्मविधि का केंद्र और चरम बिंदु है। इसमें यीशु मसीह के जीवन, शिक्षाओं, दुःखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान की घोषणा की जाती है। कलीसिया सिखाती है कि जब सुसमाचार की घोषणा की जाती है, तब मसीह अपने वचन में उपस्थित रहते हैं और अपने लोगों से स्वयं बोलते हैं।


इसी कारण सुसमाचार को विशेष सम्मान दिया जाता है। विश्वासी खड़े होते हैं, सुसमाचार की पुस्तक पर धूप चढ़ाई जा सकती है और पुरोहित या उपयाजक उसे विशेष गंभीरता एवं श्रद्धा के साथ पढ़ते हैं।


इसलिए सुसमाचार केवल बाइबिल का एक और पाठ नहीं है। यह मसीह के मुक्ति-दायक रहस्य की विशेष और गरिमापूर्ण घोषणा है।


प्रत्युत्तर-भजन के बारे में क्या?

पाठों के बीच एक और बाइबिलीय पाठ सुनने को मिलता है—प्रत्युत्तर-भजन (Responsorial Psalm)।


भजन संहिता भी पवित्र शास्त्र का ही अंग है और यह वचन की धर्मविधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पहले पाठ के बाद आता है और विश्वासियों को परमेश्वर के वचन पर मनन करने तथा उसका उत्तर देने में सहायता करता है।


प्रत्युत्तर-भजन सामान्यतः उससे पहले पढ़े गए पाठ से संबंधित होता है और इसे, संभव हो तो, गाया जाना चाहिए। इसमें पूरी सभा प्रत्युत्तर देकर सहभागी होती है।


इसलिए, यद्यपि भजन को उन तीन मुख्य पाठों में नहीं गिना जाता, फिर भी यह उनके बीच केवल एक विराम या अंतराल नहीं है। भजन के माध्यम से कलीसिया परमेश्वर के वचन को गीत के रूप में ग्रहण करती है और उसी वचन को अपनी प्रार्थना बना देती है।


पाठ हर वर्ष क्यों बदलते हैं?

यदि आप नियमित रूप से रविवार की मिस्सा में भाग लेते हैं, तो आपने देखा होगा कि सुसमाचार के पाठ एक विशेष क्रम का अनुसरण करते हैं।


रविवार के पाठों के लिए कलीसिया तीन-वर्षीय चक्र का उपयोग करती है:


- वर्ष A: संत मत्ती का सुसमाचार

- वर्ष B: संत मरकुस का सुसमाचार, जिसमें संत योहन के सुसमाचार का भी पर्याप्त उपयोग होता है

- वर्ष C: संत लूकस का सुसमाचार


संत योहन का सुसमाचार विशेष रूप से महत्वपूर्ण धर्मविधिक समयों में पढ़ा जाता है, जिनमें चालीसा काल, पास्का काल और कुछ विशेष महापर्व शामिल हैं।


पहला पाठ सामान्यतः सुसमाचार के साथ सामंजस्य रखते हुए चुना जाता है, जबकि प्रेरितों का पाठ सामान्यतः अर्ध-निरंतर क्रम में पढ़ा जाता है। इस व्यवस्था के द्वारा विश्वासियों के सामने पवित्र शास्त्र के एक व्यापक भाग को प्रस्तुत किया जाता है।


हालाँकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि किसी विशेष रविवार के प्रत्येक पाठ को कृत्रिम रूप से एक ही विषय बनाने के लिए चुना गया है। धर्मविधि सदैव मसीह के रहस्य का उत्सव मनाती है। पाठों की व्यवस्था इस प्रकार की जाती है कि सुसमाचार की घोषणा हो और विश्वासी सत्य की पूर्णता की ओर आगे बढ़ें।


वचन हमें उत्तर देने के लिए बुलाता है

वचन की धर्मविधि केवल पाठों के पढ़े जाने के साथ समाप्त नहीं हो जाती। इसमें प्रवचन, विश्वास-वचन (Creed) और विश्वासियों की प्रार्थना भी शामिल हैं।


इस पूरी प्रक्रिया में सुनने और उत्तर देने का एक सुंदर क्रम दिखाई देता है:


पाठों के माध्यम से परमेश्वर अपने लोगों से बोलते हैं;


प्रवचन के माध्यम से वचन की व्याख्या की जाती है;


और विश्वास-वचन तथा प्रार्थनाओं के द्वारा सभा विश्वास में अपना उत्तर देती है।


इसलिए, अगली बार जब आप रविवार की मिस्सा में बाइबिल के तीन पाठ सुनें, तो उन्हें केवल बाइबिल के तीन अलग-अलग अंशों के रूप में न देखें।


प्रत्युत्तर-भजन और पूरी धर्मविधिक परिस्थिति के साथ मिलकर ये पाठ पवित्र शास्त्र की एकता को हमारे सामने खोलते हैं और उस एक ही मुक्ति-कार्य की घोषणा करते हैं, जो यीशु मसीह में पूर्ण हुआ है।


द्वारा: कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर

अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए

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