- 09 October, 2026
9 अक्टूबर 2026: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि पवित्र मिस्सा के दौरान यह छोटा-सा संवाद कितनी बार दोहराया जाता है?
“प्रभु आपके साथ हों।”
“और आपकी आत्मा के साथ।”
यह संवाद मिस्सा के आरंभ में, सुसमाचार पढ़े जाने से पहले, यूखरिस्तीय प्रार्थना से पहले और अंत में विदाई के समय सुनाई देता है। ये शब्द अधिकांश कैथोलिकों को कंठस्थ हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वास्तव में इनका अर्थ क्या है?
सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि यह केवल अभिवादन करने का कोई धार्मिक तरीका नहीं है। यह एक प्राचीन मसीही अभिवादन है, जिसका उपयोग कलीसिया में प्रारंभिक शताब्दियों से होता आया है। वास्तव में, पवित्र शास्त्र में भी इसके समान अभिव्यक्तियाँ मिलती हैं, विशेषकर संत पौलुस के पत्रों में पाए जाने वाले अभिवादनों में। कलीसिया ने इन शब्दों को इसलिए सुरक्षित रखा है, क्योंकि इनमें एक साधारण मित्रतापूर्ण अभिवादन से कहीं अधिक गहरा अर्थ निहित है।
जब पुरोहित कहते हैं, “प्रभु आपके साथ हों,” तो वे अपने बारे में कोई घोषणा नहीं कर रहे होते। बल्कि वे प्रार्थना कर रहे होते हैं कि आराधना के लिए एकत्रित हुए लोगों के बीच परमेश्वर उपस्थित रहें। यह अभिवादन प्रायः धर्मविधि के किसी महत्वपूर्ण क्षण से ठीक पहले किया जाता है और विश्वासियों को आने वाले पवित्र कार्य पर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए आमंत्रित करता है।
लेकिन इसके उत्तर का क्या अर्थ है?
जिन कैथोलिकों को 2011 से पहले की मिस्सा की अनुवादित प्रार्थनाएँ याद हैं, उन्हें अब भी “और आपके साथ भी” कहना याद होगा। आज कलीसिया मूल लैटिन वाक्यांश “Et cum spiritu tuo” का अधिक शाब्दिक अनुवाद प्रयोग करती है—“और आपकी आत्मा के साथ।”
फिर पुरोहित की “आत्मा” का उल्लेख क्यों किया जाता है?
कलीसिया की शिक्षा के अनुसार, यह उत्तर विशेष रूप से अभिषिक्त सेवक को संबोधित किया जाता है। यह केवल अभिवादन लौटाने का तरीका नहीं है। बल्कि यह उस पवित्र आत्मा के वरदान को स्वीकार करता है, जो पुरोहित को पवित्र धर्मादेश (Holy Orders) के संस्कार के द्वारा प्राप्त हुआ है।
जब विश्वासी उत्तर देते हैं, “और आपकी आत्मा के साथ,” तो वे प्रार्थना करते हैं कि परमेश्वर उस पुरोहित को उसके द्वारा निभाए जा रहे सेवकाई के कार्य में सामर्थ्य प्रदान करें, जिसे वह कलीसिया की ओर से पूरा कर रहा है।
दूसरे शब्दों में, यह संवाद पुरोहित के व्यक्तित्व पर केंद्रित नहीं है। यह उस सेवकाई और बुलाहट की ओर संकेत करता है, जिसे पूरा करने के लिए उसे बुलाया गया है। विश्वासी प्रार्थना करते हैं कि जब पुरोहित सुसमाचार की घोषणा करे, यूखरिस्तीय बलिदान अर्पित करे और समुदाय की आराधना में अगुवाई करे, तब प्रभु उसका मार्गदर्शन करें।
यहाँ विश्वासियों के लिए भी एक सुंदर संदेश छिपा है। जिस प्रकार पुरोहित लोगों के लिए प्रार्थना करता है, उसी प्रकार लोग भी पुरोहित के लिए प्रार्थना करते हैं। यह संवाद मसीह की देह—कलीसिया—के भीतर पाए जाने वाले पारस्परिक सहयोग को प्रकट करता है।
मिस्सा में कोई भी अकेला खड़ा नहीं होता। पुरोहित और विश्वासी मिलकर आराधना की इस यात्रा में आगे बढ़ते हैं।
अगली बार जब आप सुनें—“प्रभु आपके साथ हों,” तो उत्तर देने से पहले एक क्षण रुकें।
ये परिचित शब्द केवल धर्मविधि की एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं। ये एक प्रार्थना हैं—कि परमेश्वर अपने लोगों के बीच उपस्थित रहें। साथ ही, ये हमें याद दिलाते हैं कि प्रत्येक पवित्र मिस्सा मसीह से मिलन का अवसर है—वही मसीह जो उन सेवकों की सेवकाई के माध्यम से आज भी अपनी कलीसिया का मार्गदर्शन करते हैं, जिन्हें उन्होंने अपनी सेवा के लिए बुलाया है।
कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर द्वारा
अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए
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