- 09 October, 2026
6 अक्टूबर 2026: क्या आपने कभी सोचा है कि याजक “आइए, हम प्रार्थना करें” कहकर थोड़ी देर रुकते क्यों हैं? उस मौन में कलीसिया क्या कर रही होती है? और इसके बाद की जाने वाली प्रार्थना हर रविवार या पर्व के अनुसार अलग-अलग क्यों होती है?
यह छोटा-सा मौन कोई खाली समय नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति को परमेश्वर की उपस्थिति के प्रति सचेत होने और मन ही मन अपनी प्रार्थनाएँ तथा विनतियाँ उनके सामने रखने का अवसर देता है।
इसके बाद एक ऐसी प्रार्थना आती है, जिसे अधिकांश कैथोलिक विश्वासी हर मिस्सा में सुनते हैं, लेकिन शायद उसका नाम नहीं जानते। इसे “कलेक्ट” (Collect) कहा जाता है।
एक ऐसी प्रार्थना जो सबको एक साथ जोड़ती है
कलेक्ट मिस्सा के आरंभिक भाग के अंत में, धर्मग्रंथ के पाठ शुरू होने से ठीक पहले आती है। याजक सभी को प्रार्थना के लिए आमंत्रित करता है, फिर पूरी सभा का ध्यान एकत्रित करके प्रार्थना का उच्चारण करता है।
इसके बाद विश्वासी “आमेन” कहते हैं और उस प्रार्थना को अपनी प्रार्थना के रूप में स्वीकार करते हैं।
“कलेक्ट” नाम परंपरागत रूप से दो अर्थों से जुड़ा माना जाता है—एक ओर यह मसीही समुदाय के एकत्रित होने की ओर संकेत करता है और दूसरी ओर यह विश्वासियों की विभिन्न प्रार्थनाओं को एक ऐसी प्रार्थना में एकत्रित करने का अर्थ रखता है, जिसे पूरी कलीसिया की ओर से अर्पित किया जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि ये प्रार्थनाएँ कितनी सावधानी और सुंदरता से लिखी गई हैं?
केवल एक छोटी-सी प्रार्थना से कहीं अधिक
कई कलेक्ट प्रार्थनाएँ एक उपयोगी ढाँचे का अनुसरण करती हैं। वे परमेश्वर को संबोधित करती हैं, उनके स्वरूप या उनके उद्धारकारी कार्य की किसी बात को स्मरण करती हैं, किसी विशेष अनुग्रह की याचना करती हैं और अंत में त्रित्व-संबंधी समापन सूत्र के साथ समाप्त होती हैं। हालांकि, प्रत्येक कलेक्ट में यह क्रम बिल्कुल एक जैसा होना आवश्यक नहीं है।
त्रित्व-संबंधी समापन कलीसिया के इस विश्वास को व्यक्त करता है कि हमारी प्रार्थना पिता के प्रति, मसीह के द्वारा और पवित्र आत्मा की एकता में अर्पित की जाती है। और जब विश्वासी “आमेन” कहते हैं, तो वे उस प्रार्थना को अपनी प्रार्थना के रूप में स्वीकार करते हैं। “आमेन” का अर्थ है—“निश्चय ही,” “हाँ,” या “ऐसा ही हो।”
हर बार कलेक्ट अलग क्यों होती है?
कलेक्ट उस विशेष धर्मविधिक समारोह की निर्धारित प्रार्थना होती है। इसलिए यह धर्मविधिक काल, रविवार या सप्ताह के दिन, महापर्व, पर्व, स्मृति-दिवस, अनुष्ठानात्मक मिस्सा या विशेष उद्देश्य से अर्पित मिस्सा के अनुसार बदलती रहती है।
आगमन-काल में कलेक्ट प्रार्थनाएँ प्रतीक्षा और तैयारी के विषयों को सामने लाती हैं।
चालीसा-काल में वे पश्चात्ताप और अनुग्रह के विषयों पर केंद्रित होती हैं।
ईस्टर काल में पुनरुत्थान और नए जीवन की खुशी तथा आशा की अभिव्यक्ति होती है।
जब किसी संत का पर्व मनाया जाता है, तब कलेक्ट में उस संत के जीवन में परमेश्वर के कार्य के लिए धन्यवाद दिया जा सकता है, संत की मध्यस्थता की प्रार्थना की जा सकती है, या यह विनती की जा सकती है कि विश्वासी उस संत के उदाहरण का अनुसरण कर सकें।
कलेक्ट उस दिन के धर्मग्रंथ के पाठों से भी सामंजस्य रख सकती है और विश्वासियों को उन पाठों को अधिक ध्यानपूर्वक सुनने के लिए तैयार करती है। हालांकि, इसका मुख्य उद्देश्य पूरे धर्मविधिक समारोह के स्वरूप और विषय को व्यक्त करना है।
इसलिए, अगली बार जब आप मिस्सा में याजक को “आइए, हम प्रार्थना करें” कहते सुनें, तो क्या आप उस मौन को और अधिक ध्यान से सुनेंगे—और उसके बाद की जाने वाली प्रार्थना को भी?
कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर द्वारा
अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए
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