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छत्तीसगढ़ के सुकमा में ईसाई धार्मिक गतिविधियों पर रोक

सुकमा, छत्तीसगढ़, 5 अक्टूबर 2026: सुकमा जिले के पोमपल्ली गांव में आयोजित एक विशेष ग्राम सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर ईसाई दफन, प्रार्थना सभाओं, विश्वास-चंगाई सत्रों और चर्च निर्माण के लिए गांव की भूमि के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इससे अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की शक्तियों की सीमाओं को लेकर सवाल उठे हैं।


ग्राम सभा ने गांव के प्रवेश द्वार पर एक सूचना लगाने का भी निर्णय लिया है, जिसमें घोषणा की जाएगी कि उसके अधिकार क्षेत्र की भूमि का “एक इंच भी” ईसाई समुदाय को आवंटित नहीं किया जाएगा। ईसाई धर्म में कथित धर्मांतरण या अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए पादरियों और ईसाई प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने के लिए एक अलग सूचना लगाने का भी प्रस्ताव है।


इस प्रस्ताव में संविधान की पांचवीं अनुसूची और अनुच्छेद 244(1), साथ ही पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) और छत्तीसगढ़ में संबंधित PESA व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। ये प्रावधान अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को आदिवासी परंपराओं की रक्षा करने और सामुदायिक संसाधनों से संबंधित कुछ शक्तियों का इस्तेमाल करने का अधिकार देते हैं।


हालांकि, जनपद सदस्य मदकम भीमा ने कहा कि कानूनी प्रावधान ग्राम सभा को केवल किसी व्यक्ति के धर्म के आधार पर लोगों को भूमि तक पहुंच से वंचित करने का अधिकार नहीं देते।


यह प्रस्ताव बस्तर के कुछ हिस्सों में धार्मिक पहचान को लेकर लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच आया है। जनवरी 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में हस्तक्षेप किया था, जिसमें एक ईसाई आदिवासी परिवार ने आरोप लगाया था कि उसे परिवार के एक मृत सदस्य को गांव में दफनाने से रोका गया था।


नवीनतम प्रस्ताव ने आदिवासी ग्राम सभाओं के पारंपरिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता तथा समानता की संवैधानिक गारंटी के बीच संतुलन पर ध्यान आकर्षित किया है।


अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन प्रस्ताव की जांच करेगा और यदि इसके किसी प्रावधान को मौजूदा कानून के विपरीत पाया गया, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।


संकलन: कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर

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