- 17 October, 2026
वेल्लोर, 16 अक्टूबर 2026: वर्ष 2011 के नवंबर महीने की एक रात, एक सेल्सियन पुरोहित ने संत जॉन बॉस्को के अवशेष को अपने हाथों में थामकर ईश्वर से करुण पुकार की। शराब की लत ने उनके जीवन पर विनाशकारी प्रभाव डाला था। इसने उनकी पुरोहिताई सेवा, रिश्तों और जीवन के उद्देश्य को कमजोर कर दिया था। वे इस लत से मुक्त होने में असमर्थ महसूस कर रहे थे और उन्हें अपने भविष्य में आशा की कोई किरण दिखाई नहीं दे रही थी। उन्होंने प्रार्थना की, “हे प्रभु, मुझे इस बुराई से मुक्ति दिला।”
निराशा से भरी यह प्रार्थना उनके जीवन में एक निर्णायक मोड़ का हिस्सा बनी। आज तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित अरुलोदयम आश्रम होलिस्टिक वेलनेस सेंटर के निदेशक के रूप में फादर ए. सिलुवई मुथु अपने व्यसन और उससे उबरने के व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर उन पुरोहितों और धर्मसमर्पित व्यक्तियों की सहायता करते हैं, जो इसी प्रकार के संघर्षों से गुजर रहे हैं।
वर्ष 2023 में स्थापित यह केंद्र शराब की निर्भरता से जूझ रहे पुरोहितों और धर्मसमर्पित व्यक्तियों के लिए विशेष आवासीय उपचार कार्यक्रम प्रदान करता है। इसका मिशन उस महत्वपूर्ण सीख पर आधारित है, जिसे फादर सिलुवई मुथु ने अपने जीवन के कठिन अनुभवों से प्राप्त किया है: स्वस्थ होने की यात्रा समस्या को स्वीकार करने और सहायता लेने के लिए तैयार होने से शुरू होती है।
जब व्यसन ने पुरोहिताई सेवा को प्रभावित किया
अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए फादर सिलुवई मुथु बताते हैं कि किस प्रकार धीरे-धीरे शराब पीने की आदत ने उनके जीवन पर नियंत्रण कर लिया। वे कई दिनों तक शराब की बोतलों के साथ एक कमरे में अकेले रहते थे। वे अपनी शराब पीने की आदत को दूसरों से छिपाते थे और अपनी अनुपस्थिति के लिए बार-बार बहाने बनाते थे।
जल्द ही इसके दुष्परिणाम उनकी प्रेरिताई और कलीसियाई जिम्मेदारियों पर भी दिखाई देने लगे। एक अवसर पर, क्रिसमस से पहले मेल-मिलाप संस्कार प्राप्त करने के लिए विश्वासी उनका इंतजार कर रहे थे। लेकिन वे शाम 8 बजे नशे की हालत में गिरजाघर पहुँचे। इस कारण विश्वासी शाम तक प्रतीक्षा करते रहे।
एक अन्य घटना में, वे ईस्टर जागरण की पवित्र मिस्सा अर्पित करने के लिए मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी वे गिर पड़े। परिणामस्वरूप, समुदाय निर्धारित पवित्र मिस्सा में शामिल नहीं हो सका।
एक अलग घटना में, एक विद्यार्थी ने उन्हें बस स्टैंड पर पड़ा हुआ देखा और इसकी सूचना प्रबंधन को दी। इस प्रकार की घटनाओं ने उनके भीतर शर्मिंदगी को और बढ़ा दिया तथा उनके लिए अपनी लत की गंभीरता को नकारना कठिन होता गया।
उनका संघर्ष अंततः उन्हें आत्महत्या करने की स्थिति तक ले गया। कई दिनों तक अत्यधिक शराब पीने के बाद वे अपना जीवन समाप्त करने के इरादे से रेलवे पटरी पर चले गए। लेकिन कुछ लोगों ने हस्तक्षेप किया और उनकी जान बचा ली। कुछ समय तक शराब से दूर रहने पर उन्हें अस्थायी राहत मिलती थी, लेकिन बाद में वे फिर उसी लत के शिकार हो जाते थे।
पुरोहित होने के बावजूद वे उस दुष्चक्र से बाहर निकलने में असमर्थ महसूस कर रहे थे, जो उनके जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रहा था।
सहायता माँगने का साहस
13 नवंबर 2011 को फादर सिलुवई मुथु ने संत डॉन बॉस्को के अवशेष को अपने हाथों में लेकर प्रार्थना की और ईश्वर से इस बंधन से मुक्ति की विनती की। तेरह दिन बाद हुई एक अन्य घटना ने उन्हें अपनी स्थिति का खुलकर सामना करने के लिए विवश कर दिया।
पवित्र मिस्सा में भाग लेने और शराब पीने के बाद, जब वे शराब की एक बोतल लेकर जा रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोक लिया। जब वे अपनी मोटरसाइकिल चालू नहीं कर पाए, तो उनके समुदाय के सदस्य उनकी सहायता के लिए आए।
अगली सुबह उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया और अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से उनके सामने रखी।
उन्होंने कहा, “मुझे सहायता की आवश्यकता है। मैं अपना जीवन संभाल नहीं पा रहा हूँ।”
अपनी कमजोरी को स्वीकार करने का यह कदम उनके स्वस्थ होने की यात्रा में निर्णायक साबित हुआ। फादर सिलुवई मुथु के अनुसार, 8 दिसंबर 2011 वह अंतिम दिन था, जब उन्होंने शराब पी थी। चार दिन बाद, 12 दिसंबर को, वे फ्रेंडशिप हाउस नामक एक पुनर्वास केंद्र में दाखिल हुए। वे अपने जीवन के पुनर्निर्माण में इस केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हैं।
स्वस्थ होने की प्रक्रिया केवल शराब पीना बंद करने के निर्णय तक सीमित नहीं थी। इसके लिए अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना, दूसरों की सहायता लेना और जीवन में स्थायी परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध होना आवश्यक था।
व्यक्तिगत संघर्ष को सेवा का मिशन बनाना
जब फादर सिलुवई मुथु अपने जीवन को फिर से सँवारने लगे, तब उन्होंने शराब की लत से प्रभावित अन्य लोगों की सहायता करना शुरू किया। इनमें वे लोग भी शामिल थे, जिनके साथ वे कभी स्वयं शराब पीते थे।
अपने अनुभव में वे लिखते हैं:
“पहले मैं उनके साथ शराब पीता था, अब मैं उनके साथ जीवन बिताता हूँ।”
ये शब्द उनके जीवन में आए परिवर्तन को दर्शाते हैं—अकेलेपन से सहभागिता की ओर और स्वयं संघर्ष करने से दूसरों को स्वस्थ होने की राह पर साथ लेकर चलने की ओर।
उनके व्यक्तिगत अनुभव ने उन्हें यह समझने में भी सहायता की कि व्यसन से जूझ रहे लोगों के प्रति करुणा और सहयोग कितना आवश्यक है। ऐसे अनेक लोग शर्मिंदगी या भय के कारण सहायता माँगने से हिचकिचाते हैं।
उनकी यही प्रतिबद्धता अंततः अरुलोदयम आश्रम होलिस्टिक वेलनेस सेंटर की स्थापना का आधार बनी। वर्ष 2023 में स्थापित यह केंद्र पुरोहितों और धर्मसमर्पित व्यक्तियों को ऐसा वातावरण प्रदान करने का प्रयास करता है, जहाँ वे अपनी गरिमा और निजता बनाए रखते हुए विशेष देखभाल प्राप्त कर सकें।
संपूर्ण व्यक्तित्व की देखभाल
इस केंद्र में 90 दिनों का आवासीय उपचार कार्यक्रम संचालित किया जाता है। इसमें चिकित्सकीय देखभाल, मनोवैज्ञानिक सहयोग, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक पुनर्वास को सम्मिलित किया गया है।
केंद्र के विवरण-पत्र के अनुसार, यह कार्यक्रम अल्कोहॉलिक्स एनोनिमस (Alcoholics Anonymous) की 12-चरणीय पद्धति पर आधारित है। इसमें शरीर से अल्कोहल के प्रभाव को समाप्त करने की चिकित्सकीय प्रक्रिया, नियमित स्वास्थ्य जाँच, व्यक्तिगत परामर्श, मनोवैज्ञानिक सत्र और स्वस्थ होने की प्रक्रिया से गुजर रहे अन्य लोगों के साथ सहभागिता शामिल है।
यहाँ आध्यात्मिक जीवन को भी विशेष महत्व दिया जाता है। प्रार्थना, ध्यान, पवित्र यूखारिस्त, यूखारिस्तीय आराधना, माला विनती और मेल-मिलाप संस्कार कार्यक्रम के अभिन्न अंग हैं।
केंद्र से उपचार पूरा करके जाने से पहले प्रत्येक व्यक्ति के लिए आगे की देखभाल की एक योजना भी तैयार की जाती है, ताकि वह अपने सामान्य जीवन में लौटने के बाद भी स्वस्थ बने रहने के प्रयासों को जारी रख सके।
आवासीय उपचार के लिए व्यक्तिगत कमरे, प्रार्थना और चिंतन के स्थान, मनोरंजन की सुविधाएँ तथा हरियाली से युक्त परिसर उपलब्ध हैं। केंद्र का कहना है कि यहाँ आने वाले निवासियों की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
फादर सिलुवई मुथु के अनुसार, केंद्र के खुलने के बाद से भारत और पड़ोसी देशों के 70 पुरोहितों एवं धर्मसमर्पित व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया है। वर्तमान में सात लोग यहाँ उपचार और सहायता प्राप्त कर रहे हैं।
केंद्र का कार्य केवल आवासीय उपचार तक सीमित नहीं है। शैक्षणिक संस्थानों में व्यसन के प्रति जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से यह युवाओं को नशे के हानिकारक प्रभावों को समझने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है।
मौन को तोड़ना
पुरोहितों और धर्मसमर्पित व्यक्तियों के लिए व्यसन की समस्या को स्वीकार करना और सहायता माँगना विशेष रूप से कठिन हो सकता है। अपनी समस्या उजागर होने का भय, शर्मिंदगी और अपनी सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता उन्हें सहायता लेने से रोक सकती है।
फादर सिलुवई मुथु का जीवन-अनुभव इस बात पर जोर देता है कि ऐसा वातावरण बनाया जाना आवश्यक है, जहाँ व्यसन से प्रभावित व्यक्ति बिना किसी भय के सहायता प्राप्त कर सकें और उनकी पहचान केवल उनके संघर्षों तक सीमित न रह जाए।
अरुलोदयम आश्रम का उद्देश्य धर्माध्यक्षों, धर्मसंघीय वरिष्ठ अधिकारियों और पुरोहितों एवं धर्मसमर्पित व्यक्तियों की देखभाल के लिए जिम्मेदार समुदायों तक पहुँचना है। केंद्र उन्हें व्यसन की समस्या को गंभीरता से पहचानने और प्रभावित व्यक्तियों को उचित उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करता है।
इस प्रकार की सहायता का अर्थ केवल किसी व्यक्ति को शराब पीना बंद करने में मदद करना नहीं है। उपचार को स्थायी बनाने के लिए चिकित्सकीय देखभाल, मनोवैज्ञानिक सहयोग, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और समुदाय का निरंतर साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जीवन का एक नया अध्याय
फादर सिलुवई मुथु की जीवन-यात्रा आशा का संदेश देती है, लेकिन साथ ही व्यसन की गंभीरता को भी स्पष्ट करती है। उनका अनुभव दर्शाता है कि निराशा से घिरा हुआ जीवन भी एक नई दिशा पा सकता है, जब व्यक्ति अपने संघर्ष को स्वीकार करता है और उसे उचित सहायता मिलती है।
जो पुरोहित कभी व्यसन के बंधन से मुक्ति पाने के लिए ईश्वर से करुण पुकार करते थे, वे आज दूसरों को नई राह दिखाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर रहे हैं।
अरुलोदयम आश्रम के माध्यम से वे उन लोगों तक पहुँचना चाहते हैं, जो अपनी पीड़ा को मौन में सहन कर रहे हैं। वे उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि सहायता माँगना असफलता का संकेत नहीं है।
व्यसन के बंधन में फँसे किसी व्यक्ति के लिए मुक्ति की यात्रा का पहला कदम शायद उतना ही सरल और उतना ही कठिन हो सकता है, जितने शब्द फादर सिलुवई मुथु ने एक दिन अपने वरिष्ठ अधिकारियों से कहे थे:
“मुझे सहायता की आवश्यकता है।”
संपर्क विवरण
अरुलोदयम आश्रम होलिस्टिक वेलनेस सेंटर
ए. कट्टुपाडि, वेल्लोर, तमिलनाडु – 632011
निदेशक: फादर डॉ. ए. सिलुवई मुथु
फोन: 94876 34447
परामर्शदाता: 94867 34447
ईमेल: ashramaruloudhayam@gmail.com
कैथोलिक कनेक्ट संवाददाता द्वारा
अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए
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