- 08 July, 2026
वेटिकन सिटी, 2 जुलाई 2026: संत पापा लियो चौदहवें ने दुनिया भर के विश्वासियों से आह्वान किया है कि वे वर्ष 2033 में प्रभु येशु मसीह के उद्धार के 2,000 वर्ष पूर्ण होने के अवसर की तैयारी के लिए एकजुट हों। वेटिकन में कॉन्स्टेंटिनोपल के एक्यूमेनिकल पैट्रिआर्केट के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने विभिन्न विश्वासी परंपराओं से अपने विश्वास को पुनः खोजने, उसे दूसरों के साथ बाँटने तथा आशा, शांति और एकता के अधिक सशक्त साक्षी बनने का आग्रह किया।
विभाजनों के समय में एकता का आह्वान
यह सभा कैथोलिक कलीसिया और कॉन्स्टेंटिनोपल के एक्यूमेनिकल पैट्रिआर्केट के बीच होने वाली पारंपरिक पारस्परिक भेंट का हिस्सा थी। यह परंपरा दोनों कलीसियाओं के संरक्षक संतों के पर्वों—रोम में संत पेत्रुस और संत पौलुस तथा कॉन्स्टेंटिनोपल में संत अन्द्रेयस—के अवसर पर निभाई जाती है।
संत पापा लियो चौदहवें ने इस भेंट को दोनों कलीसियाओं के बीच "भाईचारे की निकटता" का प्रतीक बताया और ईसाई एकता को गहरा करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।
वर्ष 2033 की ऐतिहासिक तैयारी
संत पापा लियो चौदहवें ने प्रभु मसीह के उद्धार के 2,000 वर्ष पूरे होने के आगामी अवसर को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्ष 2033 की ओर बढ़ने की यह यात्रा सभी विश्वासियों को मिलकर तय करनी है।
उन्होंने विभिन्न ईसाई संप्रदायों से आग्रह किया कि वे इस वर्षगांठ को केवल एक ऐतिहासिक स्मरण के रूप में न समझें, बल्कि इसे पुनर्जीवित प्रभु मसीह के संदेश को सम्पूर्ण संसार में फैलाने की अपनी प्रतिबद्धता को नया करने का अवसर मानें।
वर्ष 2033 उस विश्वास की 2,000वीं वर्षगांठ होगी कि प्रभु येशु मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा समस्त मानवता को उद्धार प्राप्त हुआ। संत पापा लियो चौदहवें ने कहा कि यह अवसर सभी विश्वासियों को अपने मतभेदों से ऊपर उठकर अपने मिशन पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देना चाहिए।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह उत्सव ऐसा समय बने जब सभी विश्वासी "पुनरुत्थित प्रभु के साक्षी बनने के वरदान और बुलाहट को फिर से खोजें।"
नाइसिया की महासभा से सीख
संत पापा लियो चौदहवें ने प्रथम नाइसिया महासभा (325 ई.) की 1,700वीं वर्षगांठ का भी उल्लेख किया, जिसे हाल ही में मनाया गया।
325 ई. में आयोजित इस ऐतिहासिक महासभा ने ईसाई धर्मशास्त्र को महत्वपूर्ण दिशा प्रदान की और नाइसीन विश्वास की घोषणा की रचना की, जो आज भी अनेक विश्वासी समुदायों के लिए विश्वास का आधार है।
संत पापा लियो चौदहवें ने कहा कि यह वर्षगांठ उन विश्वासियों के बीच पहले से विद्यमान सहभागिता को उजागर करती है, जो परमपिता परमेश्वर, प्रभु एवं परमेश्वर के पुत्र प्रभु येशु मसीह तथा पवित्र आत्मा में समान विश्वास रखते हैं।
उन्होंने कहा कि नाइसीन विश्वास की यह घोषणा आज भी एक्यूमेनिकल यात्रा का मार्गदर्शक है और यह दिखाती है कि वैध परंपरागत भिन्नताओं का सम्मान करते हुए भी एकता संभव है।
शांति के साक्षी बनने का आह्वान
अपने संबोधन में संत पापा लियो चौदहवें ने वर्तमान विश्व की अनेक चुनौतियों—युद्ध, राजनीतिक तनाव, सामाजिक विभाजन और बढ़ते ध्रुवीकरण—का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि विश्वास में एकजुट विश्वासियों की जिम्मेदारी है कि वे शांति के विश्वसनीय साक्षी बनें और अधिक शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
संत पापा लियो चौदहवें ने चेतावनी दी कि यदि विश्वासी इन वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना नहीं करेंगे, तो इससे हमारे ख्रीस्तीय संदेश की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी।
उन्होंने विशेष रूप से शांति स्थापना, नई तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग तथा पर्यावरण की रक्षा जैसे क्षेत्रों में अधिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
संत पापा लियो चौदहवें के अनुसार, विश्वासियों के बीच सहयोग का यह आह्वान स्वयं प्रभु येशु मसीह की शिक्षा और मानवता के प्रति विश्वासियों की जिम्मेदारी से उत्पन्न होता है।
मानव गरिमा और जीवन की रक्षा
संत पापा लियो चौदहवें ने प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा, विशेषकर समाज के सबसे कमजोर और असहाय लोगों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन और गरिमा की रक्षा हर ख्रीस्तीय का उत्तरदायित्व एवं केंद्रीय मापदंड होना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में संत पापा लियो चौदहवें ने कॉन्स्टेंटिनोपल से आए प्रतिनिधिमंडल को ख्रीस्तीय एकता को सुदृढ़ करने की उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया तथा कैथोलिक कलीसिया और अन्य ईसाई समुदायों के बीच निरंतर सहयोग के लिए प्रार्थना की।
नई आशा की ओर समन्वय यात्रा
जब सारा विश्व संघर्षों, अनिश्चितताओं और बढ़ते विभाजनों का सामना कर रहा है, तब संत पापा लियो चौदहवें का यह संदेश ख्रीस्तीयों की एकता को आशा के एक सशक्त स्रोत के रूप में प्रस्तुत करता है।
वर्ष 2033 में प्रभु मसीह के उद्धार के 2,000 वर्ष पूरे होने का यह अवसर विश्वभर के विश्वासियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन सकता है, जहाँ वे अपने मतभेदों से ऊपर उठकर विश्वास, शांति और सेवा के साथ परस्पर एकता एवं मिशन में आगे बढ़ें।
संत पापा लियो चौदहवें ने आशा व्यक्त की कि पारस्परिक सहयोग और आपसी समझ के माध्यम से ख्रीस्तीय समुदाय संसार को मेल-मिलाप, चंगाई और एकता का अधिक प्रभावशाली संदेश दे सकेगा, क्योंकि आज समस्त संसार इन मूल्यों की गहरी आवश्यकता महसूस कर रहा है।
कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर द्वारा
अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए
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