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कलकत्ता महाधर्मप्रांत ने पारदर्शिता और सामूहिक ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए पैरिश फाइनेंस कमेटियों को अनिवार्य किया

कोलकाता, 3 जुलाई 2026: स्थानीय चर्च में पारदर्शिता, जवाबदेही और साझा ज़िम्मेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कलकत्ता महाधर्मप्रांत ने सभी पल्लियों में पैरिश फाइनेंस कमेटियों का गठन अनिवार्य कर दिया है। इसका उद्देश्य चर्च की संपत्ति और संसाधनों के प्रबंधन में आम विश्वासियों की भागीदारी को मजबूत करना है।


1 जनवरी 2026 से लागू हुए इन नियमों के अनुसार, कैनन कानून 537 के तहत हर पल्ली में एक पैरिश फाइनेंस कमेटी का गठन करना आवश्यक होगा। नए नियम वित्तीय प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संरचना प्रदान करते हैं, जिसमें समिति की संरचना, जिम्मेदारियां और खर्चों की स्वीकृति की प्रक्रिया तय की गई है। साथ ही पल्ली प्रशासन में विश्वासियों की अधिक भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया गया है।


कैथोलिक कनेक्ट से बातचीत में कलकत्ता महाधर्मप्रांत के वित्त प्रशासक फादर अल्बर्ट सकायराज ने कहा कि यह पहल आर्चबिशप एलियास फ्रैंक की उस दृष्टि को दर्शाती है, जिसके तहत पल्ली के धन का प्रबंधन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किया जाए।


उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य लोगों के प्रति जवाबदेह रहना है और यह पूरी पारदर्शिता बनाए रखना है कि हमें कितना धन प्राप्त होता है और उसका उपयोग कैसे किया जाता है।"


फादर अल्बर्ट ने बताया कि विश्वासियों द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान का सावधानीपूर्वक और जिम्मेदारी से उपयोग करना हमेशा से महाधर्मप्रांत की प्राथमिकता रही है।


नए नियमों के अनुसार, पल्ली पुरोहित पल्ली की संपत्ति और धन के प्रशासन की कैनोनिकल ज़िम्मेदारी निभाते रहेंगे, जबकि पैरिश फाइनेंस कमेटी सलाहकार की भूमिका में वित्तीय योजना और निर्णय लेने में सहयोग करेगी। वार्षिक बजट और वित्तीय रिपोर्ट तैयार करते समय तथा कुछ निर्धारित श्रेणियों के खर्चों की अनुमति देने से पहले पल्ली पुरोहितों को समिति से परामर्श करना आवश्यक होगा।


नियमों में खर्चों की स्वीकृति के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। ₹15,000 से ₹25,000 तक के एकमुश्त खर्च के लिए समिति से परामर्श आवश्यक होगा, जबकि ₹25,000 से ₹50,000 तक के पूंजीगत खर्च के लिए समिति की सहमति जरूरी होगी। ₹50,000 से अधिक के खर्च के लिए महाधर्मप्रांत के वित्त प्रशासक की मंजूरी भी आवश्यक होगी। पल्ली की संपत्ति से जुड़े लेन-देन और अन्य बड़े वित्तीय निर्णयों के लिए धर्मप्रांत की अनुमति लेनी होगी।


फादर अल्बर्ट ने कहा कि इन नियमों के लागू होने का पूरे महाधर्मप्रांत में स्वागत किया गया है और पुरोहितों तथा विश्वासियों ने इस नई व्यवस्था को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है।


उन्होंने कहा, "हमें किसी गंभीर कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। सभी पुरोहितों ने पूरा सहयोग दिया और हमारे लोगों ने भी बहुत सहयोग किया।"


सीमित आर्थिक संसाधनों वाली मिशन पल्लियों में भी फाइनेंस कमेटियां बनाई गई हैं। इससे पैरिशवासियों को यह समझने में मदद मिल रही है कि धर्मप्रांत की सहायता का उपयोग पास्टोरल सेवाओं, विश्वास शिक्षा, शिक्षा कार्यों और समाजसेवा में कैसे किया जाता है। साथ ही समुदायों को धीरे-धीरे आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।


महाधर्मप्रांत ने इन नए नियमों के साथ-साथ पल्ली के वित्तीय प्रशासन में सहयोग करने वाले पुरोहितों और विश्वासियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। हर वर्ष होने वाली पुरोहितों की बैठकों में महाधर्मप्रांत और उसकी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की जाती है, जबकि ऑडिटर कैनन कानून की आवश्यकताओं और भारत के कर नियमों से संबंधित जानकारी प्रदान करते हैं। इसी तरह डीनरी स्तर पर भी प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं, ताकि सभी पल्लियों में इन नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जा सके।


नियमों के अनुसार, हर पल्ली को वार्षिक बजट तैयार करना होगा और वार्षिक आय-व्यय रिपोर्ट पैरिश पास्टोरल परिषद, पैरिशवासियों और महाधर्मप्रांत के वित्त प्रशासक के सामने प्रस्तुत करनी होगी। इससे चर्च के संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता और अधिक मजबूत होगी।


फादर अल्बर्ट के अनुसार, यह पहल केवल वित्तीय प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है।


उन्होंने कहा, "हम चाहते थे कि लोग भी पल्ली की ज़िम्मेदारी में भाग लें, क्योंकि पल्ली की देखभाल केवल पुरोहित का काम नहीं है।"


उन्होंने कहा कि अधिक भागीदारी से विश्वासियों में साझा ज़िम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।


उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती पारदर्शिता के कारण पैरिशवासी पास्टोरल गतिविधियों और सामुदायिक जीवन में अधिक सक्रिय रूप से सहयोग करने लगे हैं।


आने वाले समय में महाधर्मप्रांत "ट्विनिंग" नामक एक नई पहल शुरू करने की योजना बना रहा है, जिसके तहत आर्थिक रूप से मजबूत पल्लियों को सहायता की आवश्यकता वाली मिशन पल्लियों से जोड़ा जाएगा। इस योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि दोनों पल्लियों के लोगों के बीच व्यक्तिगत संबंध और एकता को भी मजबूत करना है, ताकि वे चर्च के मिशन में एक-दूसरे का सहयोग कर सकें।


ये नए नियम इस बात को दर्शाते हैं कि कलकत्ता महाधर्मप्रांत जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन, सहभागिता और सिनोडल चर्च की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ पुरोहित और विश्वासी मिलकर सुसमाचार की सेवा करते हैं।


कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर द्वारा

अनुवाद : शिवराज बारा

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