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नागपुर महाधर्मप्रांत ने पुनर्निर्मित कैथेड्रल का लोकार्पण कर सिनोडल मिशन के लिए अनुसंधान केंद्र का शुभारंभ किया

नागपुर, 8 जुलाई, 2026: नागपुर महाधर्मप्रांत ने अपने विश्वास और मिशन की यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव दर्ज किया। नव-जीर्णोद्धारित संत फ्रांसिस डी सेल्स कैथेड्रल के आशीर्वाद तथा आरएनआर: रिसर्च एंड रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर के उद्घाटन के साथ महाधर्मप्रांत ने कलीसिया की विरासत के संरक्षण के साथ-साथ अनुसंधान, जवाबदेही और सिनोडल नवीनीकरण की संस्कृति को अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया।


इस ऐतिहासिक समारोह में लगभग 500 पुरोहितों, धर्मसमर्पित भाई बहनों और विश्वासियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत कैथेड्रल के नव-जीर्णोद्धारित वेदी-क्षेत्र (सेंचुरी) कि आशीष से हुई। सफेद संगमरमर से पुनर्निर्मित तथा अपने मूल शास्त्रीय स्वरूप में पुनर्स्थापित यह वेदी-क्षेत्र महाधर्मप्रांत की धर्मविधिक और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति उसकी गहरी श्रद्धा का प्रतीक है।


पवित्र यूखारिस्तीय समारोह की अध्यक्षता गोवा-दमन के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल फिलिप नेरी फेराओ ने की। इस अवसर पर कार्डिनल ऑस्वाल्ड ग्रेसियस, नागपुर के महाधर्माध्यक्ष एलियास गोंसाल्वेस, पश्चिमी क्षेत्र के बिशप परिषद के 20 से अधिक बिशप, 100 से अधिक पुरोहित, धर्मसमर्पित एवं बड़ी संख्या में विश्वासी उपस्थित थे।


पवित्र मिस्सा के पश्चात् कार्डिनल ऑस्वाल्ड ग्रेसियस ने आरएनआर: रिसर्च एंड रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर का उद्घाटन किया। यह एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान, रणनीतिक योजना और प्रमाण-आधारित निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से महाधर्मप्रांत के संस्थागत जीवन को सुदृढ़ बनाना है।


केंद्र की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए महाधर्माध्यक्ष एलियास गोंसाल्वेस ने कहा कि यह पहल कलीसिया के सिनोडल आह्वान—जवाबदेही, पारदर्शिता और साझा उत्तरदायित्व—से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि यह केंद्र विश्वसनीय आँकड़े, शोध तथा संसाधन विकास उपलब्ध कराकर महाधर्मप्रांत की पास्टोरल योजना, शैक्षिक उत्कृष्टता और संस्थागत विकास को सशक्त बनाएगा।


इस अवसर पर केंद्र के प्रथम प्रमुख प्रकाशन "ए सिनोडल स्कूलयार्ड: को-रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन कैथोलिक एजुकेशन" का भी लोकार्पण किया गया। पुणे स्थित एक शोध संस्थान के सहयोग से तैयार इस अध्ययन में महाधर्मप्रांतीय शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत संचालित 47 शैक्षणिक संस्थानों का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया है।


इसमें महाधर्मप्रांतीय पास्टरल योजना 2030, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा कैथोलिक शिक्षा के लिए वेटिकन की सिनोडल एवं परिवर्तनकारी दृष्टि के आलोक में इन संस्थानों के योगदान का विश्लेषण किया गया है।

इस प्रकाशन का संपादन महाधर्माध्यक्ष एलियास गोंसाल्वेस के नेतृत्व में फादर विवियन लोबो, फादर जयप्रकाश, श्री आशीर्वाद सत्यम तथा श्री अर्नोल्ड पीटर की संपादकीय टीम ने किया।


समारोह को और भी आकर्षक बनाते हुए जीवोदया स्पेशल स्कूल के विद्यार्थियों तथा एसएफएस स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। साथ ही एक वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें महाधर्मप्रांत के कैथोलिक विद्यालयों को आधुनिक, डेटा-आधारित संस्थानों के रूप में विकसित करने की यात्रा को दर्शाया गया।


इस दिन के दोनों उद्घाटन महाधर्मप्रांत की उस दूरदर्शी सोच को प्रतिबिंबित करते हैं, जिसमें विश्वास और नवाचार का सुंदर समन्वय है। यह पहल एक ओर कलीसिया की समृद्ध आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करती है, वहीं दूसरी ओर उसकी संस्थाओं को भविष्य की पास्टरल और शैक्षिक चुनौतियों का रचनात्मक, उत्तरदायी और प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार करती है।


कैथोलिक कनेक्ट संवाददाता

अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए

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