- 25 July, 2026
नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026: शिक्षा, अवसरों, गरिमा और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं में बढ़ती चिंताओं के बीच, तथा छात्र निष्पक्षता, पारदर्शिता और न्याय की मांग करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं, ऐसे समय में भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन (सी सी बी आई) के युवा आयोग ने देशभर के धर्मप्रांतों, पैरिशों, धार्मिक समुदायों, युवा आंदोलनों और कैथोलिक शैक्षणिक संस्थानों से 26 जुलाई, रविवार को "हमारे राष्ट्र के युवाओं के लिए प्रार्थना और एकजुटता दिवस" के रूप में मनाने का आह्वान किया है।
24 जुलाई को लिखे गए एक पत्र में, सीसीबीआई युवा आयोग के अध्यक्ष बिशप इग्नेशियस डी'सूज़ा तथा कार्यकारी सचिव फादर जॉन बरमन, एमएसएफएस ने कहा कि चर्च युवाओं की बात सुनने, उनका साथ देने और प्रार्थनापूर्ण एकजुटता के साथ उनके साथ खड़े रहने के लिए बुलाया गया है।
आयोग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि युवा केवल चर्च और राष्ट्र का "भविष्य" ही नहीं हैं, बल्कि "हमारे वर्तमान का अभिन्न हिस्सा" हैं, और उनकी आशाओं, आकांक्षाओं तथा चिंताओं को सम्मान, समझ और करुणा के साथ सुना जाना चाहिए।
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आयोग ने कैथोलिक समुदायों से अपील की कि वे उन युवाओं के लिए विशेष प्रार्थना करें जो निष्पक्षता, पारदर्शिता, न्याय और सुरक्षित भविष्य की मांग करते हुए शांतिपूर्वक अपनी चिंताओं को व्यक्त कर रहे हैं। साथ ही यह भी प्रार्थना की गई कि उनकी आवाज़ों को खुलेपन और संवेदनशीलता के साथ सुना जाए तथा जिन लोगों पर ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें बुद्धि, साहस और करुणा का मार्गदर्शन प्राप्त हो।
एकजुटता की दृश्यमान अभिव्यक्ति के रूप में, धर्मप्रांतों और पैरिशों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों और पास्तोरल विवेक के अनुसार मोमबत्ती प्रार्थना जागरण, मोमबत्ती यात्रा, यूखारिस्तीय आराधना या विशेष प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। आयोग ने यह भी आग्रह किया कि रविवार के यूखारिस्तीय समारोहों के दौरान युवाओं के लिए विशेष प्रार्थना-निवेदन शामिल किए जाएँ।
पत्र में स्पष्ट किया गया कि चर्च की यह एकजुटता "न तो राजनीतिक है और न ही पक्षपातपूर्ण", बल्कि यह "एक ऐसे चर्च की करुणामयी और प्रार्थनापूर्ण प्रतिक्रिया है जो अपने युवाओं से प्रेम करता है, उनकी आशाओं और चिंताओं को साझा करता है और उनकी यात्रा में उनके साथ चलता है।"
साथ ही, आयोग ने युवाओं को भी प्रोत्साहित किया कि वे सत्य, न्याय, करुणा, मानवीय गरिमा और प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान जैसे सुसमाचार मूल्यों से प्रेरित होकर शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और ज़िम्मेदारीपूर्ण ढंग से अपनी बात व्यक्त करना जारी रखें।
पत्र में कहा गया, "हम जो प्रत्येक मोमबत्ती जलाएँ, वह आशा का प्रतीक बने। हम जो प्रत्येक प्रार्थना करें, वह हमारे युवाओं को यह विश्वास दिलाए कि वे अकेले नहीं हैं।" साथ ही इसमें यह भी कहा गया कि चर्च युवाओं की बात सुनता है, उनके साथ चलता है, उनके लिए प्रार्थना करता है और उनके सपनों तथा उनके भविष्य पर विश्वास करता है।
आयोग ने कहा कि यह समय चर्च की उस प्रतिबद्धता को और गहरा करने का अवसर बने, जिसके अंतर्गत वह युवाओं की बात सुनता है, प्रेमपूर्वक उनका साथ देता है और अधिक न्यायपूर्ण, करुणामय, शांतिपूर्ण तथा आशापूर्ण भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराता है।
पत्र में सभी विश्वासियों से आग्रह किया गया कि वे सभी युवाओं को आशा की माता मरियम की मातृसुलभ देखरेख के सुपुर्द करें और प्रार्थना करें कि वे प्रत्येक युवा का साथ दें, उनकी रक्षा करें, उन्हें प्रेरित करें तथा राष्ट्र के लिए मध्यस्थता करें ताकि वह सदैव शांति, न्याय, सत्य और सद्भाव के मार्ग पर चलता रहे।
आयोग ने अंत में चर्च के सनातन युवा मसीह से प्रार्थना करते हुए कहा कि वे सभी युवाओं को आशा, साहस और धैर्य का आशीर्वाद दें तथा उन्हें सुदृढ़ करें।
कैथोलिक कनेक्ट संवाददाता
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