- 14 July, 2026
नई दिल्ली, 14 जुलाई, 2026: कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) के मुख्यालय में चर्च में संचार (कम्युनिकेशन) की भूमिका पर आधारित एक नई पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक चर्च की पहचान, मिशन और सुसमाचार प्रचार में संचार के महत्व को धर्मशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझाती है।
डॉ. जॉन पॉल हरमन, एसवीडी द्वारा लिखित पुस्तक "कम्युनिकेशन थियोलॉजी: एवरी डलेस" का औपचारिक विमोचन 11 जुलाई को श्रीकाकुलम के बिशप रायराला विजय कुमार ने किया। वे सीबीसीआई के ऑफिस फॉर सोशल कम्युनिकेशन्स और निस्कॉर्ट के अध्यक्ष हैं।
पुस्तक की पहली प्रति वेटिकन के डिकास्ट्री फॉर कम्युनिकेशन के थियोलॉजिकल-पास्टोरल विभाग की निदेशक डॉ. नताशा गोवेकर को भेंट की गई।
इस कार्यक्रम का आयोजन सीबीसीआई के महासचिव फादर डॉ. मैथ्यू कोयिक्कल ने किया। समारोह में फादर बिजू अलप्पाट, डॉ. बाबू जोसेफ, एसवीडी, कई पुरोहित, धर्मबहनें, मीडिया से जुड़े लोग और संचार विषय के विद्वान भी उपस्थित थे।
यह पुस्तक प्रसिद्ध कैथोलिक धर्मशास्त्री कार्डिनल एवरी डलेस के विचारों से प्रेरित है। इसमें चर्च के संचार के छह प्रमुख मॉडल बताए गए हैं—संस्थागत मॉडल, उद्घोषक मॉडल, संस्कारात्मक मॉडल, रहस्यमय सहभागिता मॉडल, सेवक मॉडल और शिष्यों के समुदाय का मॉडल।
लेखक का कहना है कि संचार केवल प्रशासनिक या प्रचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह चर्च की पहचान, जीवन और मिशन का अभिन्न हिस्सा है।
पुस्तक विमोचन के दौरान डॉ. हरमन ने कहा कि यह पुस्तक कार्डिनल डलेस की प्रसिद्ध कृति "चर्च के मॉडल" से प्रेरित है। इसमें बताया गया है कि चर्च का प्रत्येक मॉडल सुसमाचार को लोगों तक पहुँचाने और विश्वासियों के बीच एकता स्थापित करने का अपना अलग तरीका प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक विशेष रूप से चर्च की सिनोडल यात्रा के लिए उपयोगी है। इसमें बताया गया है कि प्रभावी संचार के माध्यम से चर्च में सहभागिता, एकता और मिशन को कैसे मजबूत किया जा सकता है। साथ ही, यह पुस्तक आधुनिक संचार, डिजिटल मीडिया, पास्टोरल सेवकाई और चर्च नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रकाश डालती है।
यह पुस्तक धर्मशास्त्र के विद्यार्थियों, धर्मशिक्षार्थियों, पुरोहितों, धर्मबहनों, संचार विशेषज्ञों, पास्टोरल कार्यकर्ताओं और चर्च नेतृत्व से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री मानी जा रही है।
कार्डिनल एवरी डलेस (1918–2008) 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली कैथोलिक धर्मशास्त्रियों में से एक थे। वे एक जेसुइट पुरोहित और चर्च-विज्ञान के प्रसिद्ध विद्वान थे। उन्होंने 22 से अधिक पुस्तकें और 700 से अधिक शोध लेख लिखे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "चर्च के मॉडल" (1974) आज भी दुनिया भर में चर्च-विज्ञान के अध्ययन की महत्वपूर्ण पुस्तकों में गिनी जाती है। वर्ष 2001 में पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें कार्डिनल नियुक्त किया था। वे ऐसे पहले अमेरिकी धर्मशास्त्री थे, जिन्हें बिशप बनाए बिना ही कार्डिनल का सम्मान दिया गया।
"कम्युनिकेशन थियोलॉजी: एवरी डलेस" का प्रकाशन समकालीन कैथोलिक धर्मशास्त्र के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। यह पुस्तक डिजिटल युग में चर्च को यह समझने के लिए प्रेरित करती है कि प्रभावी संचार उसके जीवन, गवाही और मिशन का एक आवश्यक अंग है।
— कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर
अनुवाद : शिवराज बारा
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