- 14 July, 2026
जुलाई 10, 2026: दक्षिण 24 परगना के सुभाषग्राम में निर्माणाधीन चर्च पर कथित हमले के बाद पश्चिम बंगाल में विश्वासियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ और गहरा गई हैं। चर्च नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने राज्य में ईसाई समुदायों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों की श्रृंखला पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से उपासना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग की है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, 5 जुलाई को एक भीड़ ने सुभाषग्राम स्थित निर्माणाधीन चर्च में कथित रूप से घुसकर “जय श्री राम” और “हिंदू हिंदू भाई भाई” जैसे नारे लगाए तथा संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। परिसर में लगाए गए कई क्रॉस भी कथित रूप से तोड़ दिए गए, जिससे स्थानीय ईसाई समुदाय में गहरा दुख और आक्रोश व्याप्त हो गया।
निवासियों ने इस घटना को न केवल उनके उपासना स्थल, बल्कि उनकी धार्मिक पहचान पर भी हमला बताया।
सुभाषग्राम की यह घटना उसी दिन पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से सामने आई कई अन्य घटनाओं में से एक थी।
मुर्शिदाबाद जिले में एक ईसाई विधवा बरनाली चटर्जी पर कथित रूप से इसलिए हमला किया गया क्योंकि उन्होंने अपना विश्वास त्यागने से इनकार कर दिया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कुछ लोग उनके घर में घुस आए, घरेलू सामान को नुकसान पहुँचाया और हिंदू मंदिर निर्माण के लिए उनकी जमीन सौंपने का दबाव बनाया।
बांकुड़ा जिले में पादरी राजीब दास ने आरोप लगाया कि कुछ कार्यकर्ताओं ने एक प्रार्थना सभा में बाधा डाली, बाइबलें जब्त कर लीं और महिलाओं तथा बच्चों सहित उपस्थित लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में रखा। बाद में बिना कोई मामला दर्ज किए उन्हें छोड़ दिया गया।
एक अन्य घटना सोनारपुर के सुवास ग्राम स्थित मिजो सिनॉड चर्च में सामने आई, जहाँ चर्च नेताओं ने बताया कि उपद्रवियों ने खिड़कियाँ तोड़ दीं, वेदी का अपमान किया, संगीत वाद्ययंत्रों को क्षतिग्रस्त कर दिया और दीवारों पर धमकी भरे संदेश लिख दिए, जिनमें विश्वासियों को भविष्य में प्रार्थना सभाएँ न करने की चेतावनी दी गई थी।
पूर्व बर्धमान जिले के फरीदपुर स्थित ग्रेस चर्च पर भी रविवार की आराधना के दौरान कथित हमला किया गया। पादरी सूरजीत घोष ने बताया कि एक भीड़ चर्च में घुस आई, परिसर में तोड़फोड़ की और आराधना में उपस्थित लोगों के साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चर्च के खिलाफ शत्रुता भड़काने के लिए झूठे आरोप फैलाए गए। बाद में पुलिस ने पादरी और चर्च के कुछ सदस्यों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया।
पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के विभिन्न ईसाई संप्रदायों का प्रतिनिधित्व करने वाली छत्र संस्था बंगाल की इसाई परिषद ने प्रभावित चर्चों को कानूनी सहायता देने की पेशकश की है। परिषद ने पश्चिम बंगाल सरकार से पीड़ितों को न्याय दिलाने और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को और मजबूत करने की अपील की है।
चर्च नेताओं ने इन घटनाओं की निष्पक्ष जाँच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा धर्म की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार की रक्षा और राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए नए सिरे से प्रयास करने की मांग की है।
सौजन्य: मैटर्स इंडिया
चित्र सौजन्य: मैटर्स इंडिया
अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए
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