- 09 July, 2026
राँची, 9 जुलाई, 2026: सेंट अल्बर्ट्स कॉलेज, राँची में शैक्षणिक वर्ष 2026–27 का उद्घाटन समारोह "Call to Rebuild the Church" (चर्च के पुनर्निर्माण का आह्वान) विषय के साथ सम्पन्न हुआ। समारोह में आध्यात्मिक जीवन, बौद्धिक विकास, पुरोहितीय निर्माण तथा बदलते समय में चर्च और समाज के नवीनीकरण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के कॉमन चैपल में पवित्र यूखारिस्तीय समारोह से हुआ, जिसकी अध्यक्षता राँची महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप, पोंटिफिकल फैकल्टी ऑफ थियोलॉजी तथा सेंट अल्बर्ट्स इंस्टीट्यूट ऑफ फिलॉसफी के मॉडरेटर एवं चांसलर महाधर्माध्यक्ष विन्सेंट आइंद ने की।
अपने प्रवचन में महाधर्माध्यक्ष विन्सेंट आइंद ने कहा कि ईश्वर ही ज्ञान, प्रज्ञा और आध्यात्मिकता के परम स्रोत हैं तथा पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन से ही मनुष्य सच्ची बुद्धि और आध्यात्मिक परिपक्वता प्राप्त करता है। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे निरंतर ज्ञान, प्रज्ञा और आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ते हुए अपने जीवन को ईश्वर की इच्छा के अनुरूप ढालें।
यूखारिस्तीय समारोह के उपरांत कॉलेज सभागार में उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। सेंट अल्बर्ट्स कॉलेज के रेक्टर फा. अजय कुमार खलखो ने अतिथियों, प्रतिनिधियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। इसके पश्चात नए शैक्षणिक वर्ष का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
पोंटिफिकल फैकल्टी ऑफ थियोलॉजी, राँची के अध्यक्ष फा. डॉ. सुमन कुमार एक्का ने उद्घाटन संबोधन में विद्यार्थियों को समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद फैकल्टी के रजिस्ट्रार फा. डॉ. भूषण बड़ा तथा सेंट अल्बर्ट्स इंस्टीट्यूट ऑफ फिलॉसफी के निदेशक फा. डॉ. राजू फेलिक्स क्रस्ता ने गत शैक्षणिक वर्ष के अंतिम परीक्षा परिणामों की घोषणा की। इस अवसर पर महाधर्माध्यक्ष विन्सेंट आइंद ने सफल विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं डिप्लोमा प्रदान किए। समारोह में 21 विद्यार्थियों को बैचलर ऑफ फिलॉसफी, पाँच विद्यार्थियों को डिप्लोमा इन फिलॉसफी, 20 विद्यार्थियों को बैचलर ऑफ थियोलॉजी तथा दो विद्यार्थियों को डिप्लोमा इन थियोलॉजी की उपाधियाँ प्रदान की गईं।
पोंटिफिकल फैकल्टी ऑफ थियोलॉजी, राँची के उपकुलपति खूंटी के बिशप विनय कंडुलना ने सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि कैथोलिक पुरोहितों के निर्माण में दर्शनशास्त्र और ईशशास्त्र दोनों समान रूप से आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा, "विश्वास (Faith) और तर्क (Reason) एक-दूसरे के पूरक हैं। इन्हीं के माध्यम से मनुष्य सत्य की खोज करता है तथा ईश्वरीय प्रकाशन (Divine Revelation) को सही ढंग से समझने में सक्षम बनता है।"
उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में समाज और विश्व तीव्र गति से बदल रहे हैं। ऐसे समय में संत जॉन पॉल द्वितीय के संदेश को स्मरण करते हुए प्रत्येक पुरोहित, धर्मसमर्पित व्यक्ति और विश्वासी को मसीह से नए उत्साह के साथ शुरुआत करनी चाहिए तथा उनके साथ अपने व्यक्तिगत संबंध को और अधिक गहरा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "आज का आह्वान केवल चर्च के पुनर्निर्माण का नहीं, बल्कि मानवता, समाज और सृष्टि के नवीनीकरण का भी है।" उन्होंने विद्यार्थियों से बौद्धिक, आध्यात्मिक एवं मानवीय गुणों में निरंतर विकास करने तथा समकालीन चुनौतियों का प्रभावी पादरीय सेवा के माध्यम से उत्तर देने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि आज कैथोलिक कलीसिया सिनोडलिटी की भावना के साथ मिलकर चलने, साथ मिलकर निर्णय लेने और साथ मिलकर आगे बढ़ने की दिशा में कार्य कर रही है।
इंडियन करंट, मैग्नेट पत्रिका तथा कैथोलिक कनेक्ट के संपादक फा. सुरेश मैथ्यू, ओएफएम कैप. ने स्कोला ब्रेविस व्याख्यान प्रस्तुत किया। "Call to Rebuild the Church" विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने संत फ्रांसिस असीसी की 800वीं जयंती (1226–2026) के अवसर पर उनके जीवन और संदेश की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि संत फ्रांसिस का जीवन सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा है। उन्होंने निर्धनों, उपेक्षितों और हाशिए पर रहने वाले लोगों की सेवा को सच्चे ईसाई जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि जयंती वर्ष केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन और समाज-परिवर्तन का आह्वान है।
संत फ्रांसिस की विरासत के पाँच प्रमुख आयामों—निर्धनों के साथ खड़े होना और उनके अधिकारों की रक्षा करना, सांप्रदायिक सौहार्द एवं सम्पूर्ण मानव परिवार में भाईचारे को बढ़ावा देना, सृष्टि एवं पर्यावरण की रक्षा को आध्यात्मिक उत्तरदायित्व मानना, सरल एवं सादगीपूर्ण जीवन शैली अपनाना तथा सार्वभौमिक बंधुत्व, शांति और प्रेम का संवर्धन करना—पर भी उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि संत फ्रांसिस ने स्वेच्छा से धन-संपत्ति का त्याग कर ईश्वर की दिव्य व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास रखा तथा समाज के उपेक्षित और गरीब लोगों में मसीह का दर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनका संदेश आज भी शांति, गरीबी के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अत्यंत प्रासंगिक एवं प्रेरणादायी है।
समारोह के दौरान सेंट अल्बर्ट्स इंस्टीट्यूट ऑफ फिलॉसफी के निदेशक फादर राजू फेलिक्स क्रस्ता द्वारा सम्पादित पुस्तक Awakening the Indigenous Soul: Possibilities, Promises and Perils का भी विमोचन किया गया।
गोस्सनर कॉलेज, राँची, नवीन डोमेन थियोलॉजिकल कॉलेज सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, प्रोफेसरों, अतिथियों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह ने चर्च के पुनर्निर्माण, समग्र मानवीय विकास और सुदृढ़ पुरोहितीय निर्माण के संदेश को केंद्र में रखा।
कैथोलिक कनेक्ट संवाददाता
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