- 23 October, 2026
23 अक्टूबर 2026 | पश्चिम मिदनापुर, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले में तीन ईसाई परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें धमकाया गया और लगातार तीन दिनों तक हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया। इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिवारों के घरों के पास सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया है।
बताया गया है कि ये घटनाएँ 18, 19 और 20 अक्टूबर को चंद्रकोना थाना क्षेत्र में हुईं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उन पर ईसाई धर्म छोड़ने का दबाव बनाया और पुलिस से संपर्क करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
पुलिस ने हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी, महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने और लूटपाट सहित विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है।
एक 40 वर्षीय महिला ने बताया कि 18 अक्टूबर को दोपहर लगभग 3:30 बजे कुछ लोग उनके घर पहुँचे। उन्होंने कथित तौर पर महिला और उनके 50 वर्षीय पति को घर से बाहर खींचा और उनके साथ मारपीट की। महिला का आरोप है कि उनके कपड़े फाड़ दिए गए और सार्वजनिक रूप से उन पर पानी डालते हुए उन्हें तुलसी तथा बेलपत्र खाने के लिए मजबूर किया गया। कथित तौर पर यह सब शुद्धिकरण की एक धार्मिक प्रक्रिया के नाम पर किया गया।
यह दंपति घर पर तांबे के आभूषण बनाकर अपना जीवनयापन करता है। महिला के अनुसार, इसके बाद हमलावरों ने दो अन्य ईसाई परिवारों के घरों में घुसकर उनके सदस्यों के साथ भी मारपीट की। आरोप है कि एक परिवार के घर से 20,000 रुपये भी ले लिए गए और सभी परिवारों को पुलिस में शिकायत करने पर धमकाया गया।
महिला ने बताया कि परिवारों ने शुरुआत में पुलिस के आपातकालीन नंबर 100 पर फोन किया। इसके बाद पुलिसकर्मी मौके पर पहुँचे और उनकी शिकायत सुनी। हालाँकि, 19 अक्टूबर की सुबह कथित तौर पर वही समूह दोबारा आया और परिवारों के सदस्यों को पास के एक गाँव में स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में ले गया। वहाँ उन्हें लोगों के सामने अंजलि अर्पित करने के लिए मजबूर किया गया। महिला के अनुसार, हमलावर इस बात से नाराज थे कि परिवारों ने पहले पुलिस से संपर्क किया था।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे परिवार की एक नाबालिग लड़की पर हमला किया गया। 20 अक्टूबर को तीनों परिवारों के पुरुष सदस्यों को कथित तौर पर धमकाकर अपने साथ ले जाया गया। महिला के अनुसार, जब उनके पति और अन्य पुरुष सदस्य वापस लौटे, तो वे रो रहे थे।
आगे भी हिंसा होने की आशंका के चलते परिवारों ने अपनी तीन नाबालिग लड़कियों को एक रिश्तेदार के घर भेज दिया। इसके बाद महिला ने समुदाय के लोगों से संपर्क किया और दोबारा पुलिस के पास पहुँची। पुलिसकर्मी परिवारों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले गए, जिसके बाद उन्होंने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके घरों के पास चार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। महिला ने पुलिस की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया, लेकिन कहा कि परिवारों को अब भी धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उन्हें डर है कि सुरक्षा व्यवस्था हटने के बाद उन पर दोबारा हमला हो सकता है। उन्होंने अपने बीमार ससुर और बुजुर्ग सास की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की, जो उनके साथ रहते हैं।
कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले एक अधिवक्ता, जिन्होंने परिवारों की सहायता की, ने बताया कि 20 अक्टूबर को उनके पुलिस थाने पहुँचने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट लिखे जाने तक कथित आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना ने शिकायत मिलने और जांच जारी होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि परिवारों को पुलिस थाने लाया गया था और उनकी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए उनके घरों के पास पुलिस पिकेट स्थापित की गई है। पुलिस ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षा की अपील की है। उनका कहना है कि वे अपने घरों में शांति और सम्मान के साथ रहना चाहते हैं, बिना किसी डर, धमकी या हिंसा के।
स्रोत एवं सौजन्य: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस
अनुवाद : शिवराज बारा
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