- 23 October, 2026
23 अक्टूबर, 2026: क्या आपने ध्यान दिया है कि कैथोलिक विश्वासी वचन-विधि (Liturgy of the Word) के अधिकांश समय बैठे रहते हैं, लेकिन सुसमाचार की घोषणा के समय खड़े हो जाते हैं? बैठने और खड़े होने की ये मुद्राएँ केवल परंपरा नहीं हैं। ये धर्मविधि के प्रत्येक भाग के विशेष महत्त्व को व्यक्त करती हैं और पूरी सभा को शरीर तथा आत्मा से प्रार्थना में सहभागी होने में सहायता करती हैं।
1. बैठना: सुनना और मनन करना
प्रारंभिक प्रार्थना (Collect) के बाद विश्वासी पहले पाठ, प्रतिउत्तर भजन और दूसरे पाठ के दौरान बैठते हैं। रोमन मिस्सल के सामान्य निर्देश (General Instruction of the Roman Missal) के अनुसार, विश्वासी सुसमाचार से पहले के पाठों तथा प्रतिउत्तर भजन के दौरान बैठे रहते हैं।
बैठने की मुद्रा ध्यानपूर्वक सुनने और ग्रहणशील होने का प्रतीक है। जिस प्रकार शिष्य अपने गुरु की शिक्षा ध्यान से सुनते हैं, उसी प्रकार विश्वासी ईश्वर के वचन को सुनते हैं, उस पर मनन करते हैं और उसे अपने विश्वास को आकार देने देते हैं।
किसी पाठ के समाप्त होने के बाद कुछ क्षणों का मौन रखा जा सकता है, ताकि श्रद्धालु सुने गए वचन पर मनन कर सकें।
प्रतिउत्तर भजन केवल दो पाठों के बीच का विराम नहीं है। यह वचन-विधि का एक अभिन्न अंग है, जो श्रद्धालुओं को पवित्र शास्त्र के शब्दों के माध्यम से ईश्वर के वचन का उत्तर देने में सहायता करता है।
2. खड़े होना: सुसमाचार में मसीह का स्वागत करना
जैसे ही अल्लेलूया या कोई अन्य सुसमाचार-जयघोष—विशेषकर चालीसा काल में—आरंभ होता है, श्रद्धालु खड़े हो जाते हैं और सुसमाचार का पाठ समाप्त होने तक खड़े रहते हैं।
यह जयघोष सुसमाचार का स्वागत करता है और श्रद्धालुओं को उसे ग्रहण करने के लिए तैयार करता है।
सुसमाचार वचन-विधि का सर्वोच्च बिंदु है। खड़े होकर और जयघोष में सहभागी होकर विश्वासी यह स्वीकार करते हैं कि सुसमाचार में मसीह स्वयं उनके बीच उपस्थित हैं और उनसे बात कर रहे हैं।
इस विशेष सम्मान का अर्थ यह नहीं है कि बाइबल के अन्य पाठ कम प्रेरित हैं या कम आदर के योग्य हैं। बल्कि सुसमाचार को विशेष धर्मविधिक सम्मान दिया जाता है, क्योंकि इसमें प्रभु येसु मसीह के वचनों और उनके उद्धारकारी कार्यों का वर्णन है, विशेषकर उनके दुःखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान का।
इसी कारण सुसमाचार की पुस्तक को विशेष शोभायात्रा में ले जाया जा सकता है, उस पर धूप चढ़ाई जा सकती है और उसके साथ मोमबत्तियाँ लाई जा सकती हैं।
3. प्राचीन ईसाई परंपरा का एक प्रतीक
खड़े होना प्राचीन काल से ही आध्यात्मिक सजगता, ईश्वर की इच्छा पूरी करने की तत्परता और मसीह के पुनरुत्थान में सहभागिता का प्रतीक रहा है।
इसलिए कैथोलिक विश्वासी सुसमाचार के समय केवल सम्मान प्रकट करने के लिए ही खड़े नहीं होते, बल्कि पुनर्जीवित प्रभु का स्वागत करने और उनके वचन के अनुसार जीवन जीने का संकल्प लेने के लिए भी खड़े होते हैं।
सुसमाचार के समय खड़े होना हमें याद दिलाता है कि ईश्वर का वचन केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारने के लिए भी है।
कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर द्वारा
अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए
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