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पवित्र मिस्सा में उत्तरदायी भजन क्यों गाया जाता है? क्या आप इसका महत्व जानते हैं?

19 अक्टूबर 2026: वचन की धर्मविधि (Liturgy of the Word) के दौरान, प्रथम पाठ के बाद सामान्यतः एक भजन का पाठ या गायन किया जाता है। देखने में यह दो पाठों के बीच एक छोटा-सा विराम लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह पवित्र मिस्सा का एक महत्वपूर्ण अंग है।


उत्तरदायी भजन (Responsorial Psalm) पवित्र वचन, प्रार्थना और ईश्वर के वचन की उद्घोषणा है। यह कलीसिया को ईश्वर के वचन को ग्रहण करने और विश्वास के साथ उसका उत्तर देने में सहायता करता है।


1. भजन वचन की धर्मविधि का अभिन्न अंग है

उत्तरदायी भजन केवल दो पाठों के बीच गाया जाने वाला कोई वैकल्पिक गीत नहीं है। रोमन मिस्सल के सामान्य निर्देश (General Instruction of the Roman Missal) में इसे “वचन की धर्मविधि का अभिन्न अंग” कहा गया है।


इसलिए यह पाठों, सुसमाचार और प्रवचन के साथ ईश्वर के वचन की उद्घोषणा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


सामान्यतः यह भजन धर्मविधिक पाठ-पुस्तक (Lectionary) से लिया जाता है और दिन के पाठों के साथ उसके संबंध को ध्यान में रखते हुए चुना जाता है। इसके विषय अक्सर पहले पाठ में घोषित संदेश को और गहराई प्रदान करते हैं, उसकी प्रतिध्वनि करते हैं या उसके अर्थ को स्पष्ट करते हैं।


फिर भी, भजन को केवल प्रथम पाठ के बाद गाया जाने वाला संगीतमय उत्तर नहीं समझना चाहिए। यह स्वयं पवित्र वचन का एक संदेश है, जिसे कलीसिया प्रार्थना और गायन के माध्यम से घोषित करती है।


2. इसे “उत्तरदायी भजन” क्यों कहा जाता है?

इसका नाम मुख्य रूप से इसकी विशेष संरचना से जुड़ा है।


भजन गायक या भजन-वाचक (Psalmist/Cantor) भजन की पंक्तियों का गायन करता है, जबकि विश्वासी एक निश्चित प्रत्युत्तर या अनुवाक्य को बार-बार गाते हैं।


इस प्रकार, विश्वासी केवल सुनने वाले नहीं रहते, बल्कि प्रार्थना में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। वे ईश्वर के वचन को ग्रहण करते हैं और सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से उसका उत्तर देते हैं।


उदाहरण के लिए, ईश्वर की विश्वासयोग्यता के बारे में पाठ सुनने के बाद विश्वासी इस प्रकार प्रत्युत्तर दे सकते हैं:


“प्रभु मेरे चरवाहे हैं; मुझे किसी बात की कमी नहीं होगी।”


यह उत्तर केवल पाठ पर की गई टिप्पणी नहीं है। यह ईश्वर पर विश्वास और भरोसा प्रकट करने वाली पूरी कलीसिया की प्रार्थना है।


रोमन मिस्सल के सामान्य निर्देश के अनुसार, सामान्यतः विश्वासी भजन के दौरान बैठे रहते हैं, उसकी पंक्तियों को ध्यानपूर्वक सुनते हैं और निर्धारित प्रत्युत्तर गाकर उसमें भाग लेते हैं।


3. कलीसिया पवित्र वचन के शब्दों से प्रार्थना करती है

भजन हमें सिखाते हैं कि हम ईश्वर से किस प्रकार बात करें।


भजनों में स्तुति, धन्यवाद, पश्चात्ताप, दुःख, विश्वास, लालसा और आशा जैसे अनेक भाव व्यक्त होते हैं। वे मानवीय जीवन के विभिन्न अनुभवों को शब्द देते हैं और उन अनुभवों को प्रभु के सामने प्रस्तुत करते हैं।


भजनों के माध्यम से कलीसिया सीखती है कि ईश्वर के सामने केवल अपने व्यक्तिगत विचारों के सहारे ही नहीं, बल्कि पवित्र शास्त्र की प्रेरित वाणी के माध्यम से भी प्रार्थना करनी चाहिए।


कलीसिया की धर्मशिक्षा (Catechism of the Catholic Church) सिखाती है:


“मसीह में प्रार्थना किए गए और पूर्ण हुए भजन, कलीसिया की प्रार्थना का एक अनिवार्य और स्थायी अंग हैं।”


इसलिए पवित्र मिस्सा में भजन एक साथ दो कार्य करता है—यह हमसे संबोधित ईश्वर का वचन भी है और ईश्वर को संबोधित कलीसिया की प्रार्थना भी।


जिस पवित्र आत्मा ने भजनों की प्रेरणा दी, वही पवित्र आत्मा उनके माध्यम से हमसे बोलता है और हमें उस वचन को ग्रहण करने तथा उसका उत्तर देने में सहायता करता है।


4. भजन के दौरान विश्वासी बैठे क्यों रहते हैं?

बैठने की मुद्रा ध्यानपूर्वक सुनने का प्रतीक है।


भजन के समय विश्वासी ईश्वर के वचन को ग्रहण कर रहे होते हैं और साथ ही प्रार्थना भी कर रहे होते हैं। वे भजन-वाचक द्वारा गाई गई पंक्तियों को सुनते हैं और निर्धारित प्रत्युत्तर में सम्मिलित होते हैं।


इस प्रकार, उद्घोषणा और सहभागिता का एक सुंदर क्रम बनता है—भजन गायक गाता है और विश्वासी उत्तर देते हैं।


भजन का गायन वेदी-वचन मंच (Ambo) या किसी अन्य उपयुक्त स्थान से किया जा सकता है। यदि भजन गायक उपलब्ध न हो, तो पाठ-वाचक भी भजन का पाठ कर सकता है।


5. भजन सामान्यतः गाया क्यों जाता है?

कलीसिया उत्तरदायी भजन के गायन को प्राथमिकता देती है, क्योंकि संगीत विश्वासियों को उसके आध्यात्मिक अर्थ को समझने और उस पर मनन करने में सहायता करता है।


धुन के साथ गाए गए शब्द हृदय में अधिक गहराई से उतर सकते हैं। इससे विश्वासियों का प्रत्युत्तर केवल बोलकर दिया गया उत्तर नहीं रह जाता, बल्कि सच्ची प्रार्थना का रूप ले लेता है।


इसलिए, जहाँ संभव हो, भजन को गाया जाना चाहिए, विशेषकर उसके प्रत्युत्तर को। यदि गायन संभव न हो, तो उसका पाठ इस प्रकार किया जाना चाहिए कि विश्वासी ईश्वर के वचन पर मनन कर सकें।


यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात संगीत की मधुरता या गायन की गुणवत्ता नहीं, बल्कि ईश्वर के वचन की श्रद्धापूर्ण उद्घोषणा और प्रार्थनामय सहभागिता है।


6. उत्तरदायी भजन के स्थान पर कोई भजन-गीत क्यों नहीं गाया जा सकता?

क्योंकि उत्तरदायी भजन पवित्र वचन का अंग है, इसलिए सामान्यतः उसके स्थान पर कोई असंबंधित स्तुतिगान या भक्तिपूर्ण गीत नहीं गाया जा सकता।


कोई धार्मिक गीत भी ईसाई विश्वास और ईश्वर की स्तुति को व्यक्त कर सकता है, लेकिन उत्तरदायी भजन की धर्मविधि में एक विशिष्ट भूमिका है। यह वचन की धर्मविधि के लिए निर्धारित पवित्र वचन का पाठ है।


संयुक्त राज्य अमेरिका के धर्मप्रांतों में लागू रोमन मिस्सल के सामान्य निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उत्तरदायी भजन के स्थान पर अन्य गीतों या भजन-गीतों का प्रयोग नहीं किया जा सकता।


धर्मविधि की पुस्तकों में कुछ स्वीकृत विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं, जैसे कोई अन्य अनुमत भजन या निर्धारित ग्रादुआले (Gradual)। लेकिन ये विकल्प भी पवित्र शास्त्र पर आधारित अथवा कलीसिया द्वारा आधिकारिक रूप से स्वीकृत धर्मविधिक गायन के रूप हैं।


7. भजन हमें मसीह की ओर ले जाते हैं

भजन पुराने विधान का हिस्सा हैं, लेकिन ईसाई उन्हें प्रभु येसु मसीह के प्रकाश में पढ़ते और प्रार्थना में उपयोग करते हैं।


मसीह ने स्वयं भजनों के साथ प्रार्थना की, उनमें व्यक्त आशाओं को पूरा किया और उनकी प्रतिज्ञाओं को पूर्णता तक पहुँचाया।


जब कलीसिया पवित्र मिस्सा में भजनों की प्रार्थना करती है, तब वह मसीह के साथ और मसीह के माध्यम से प्रार्थना करती है। विलाप, विश्वास, स्तुति और धन्यवाद के शब्द मसीह के शरीर अर्थात् कलीसिया की प्रार्थना का हिस्सा बन जाते हैं।


दुःख और पीड़ा का भजन हमें मसीह के दुःखभोग की ओर ले जा सकता है।


धन्यवाद का भजन कलीसिया की यूखारिस्तीय स्तुति की प्रतिध्वनि बन सकता है।


ईश्वर को राजा घोषित करने वाला भजन हमारा ध्यान मसीह के राज्य की ओर आकर्षित करता है।


आशा व्यक्त करने वाला भजन हमें मसीह के पुनरुत्थान की याद दिलाता है।


इस प्रकार, उत्तरदायी भजन पाठों और सुसमाचार के बीच संबंध स्थापित करने में सहायता करता है। यह हमें दिखाता है कि मुक्ति के इतिहास की संपूर्णता मसीह में पूर्ण होती है।


8. भजन दो पाठों के बीच केवल एक विराम नहीं है

भजन एक ऐसा पवित्र अवसर प्रदान करता है, जिसमें विश्वासी अगले पाठ को सुनने से पहले कुछ क्षण रुक सकते हैं, ध्यानपूर्वक सुन सकते हैं और प्रार्थना कर सकते हैं।


लेकिन यह केवल दो पाठों के बीच का विराम या धर्मविधि की पृष्ठभूमि में बजने वाला संगीत नहीं है।


यह वह क्षण है, जब कलीसिया ईश्वर के वचन को अपने हृदय में जड़ पकड़ने देती है।


प्रथम पाठ के तुरंत बाद कोई दूसरा मानवीय विचार या व्याख्या प्रस्तुत नहीं की जाती। इसके बजाय, कलीसिया पवित्र वचन से प्रेरित प्रार्थना के माध्यम से ईश्वर को उत्तर देती है।


यह क्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है:


1. ईश्वर अपने वचन के माध्यम से बोलते हैं।

2. कलीसिया उनके वचन को ग्रहण करती है।

3. भजन-वाचक भजन का गायन करता है।

4. विश्वासी प्रार्थना के माध्यम से उत्तर देते हैं।

5. वचन की धर्मविधि सुसमाचार की ओर आगे बढ़ती है।


इस प्रकार, भजन मनन और उद्घोषणा—दोनों का कार्य करता है। यह विश्वासियों को ईश्वर के वचन पर चिंतन करने में सहायता करता है और साथ ही धर्मविधि में पवित्र शास्त्र की उद्घोषणा को आगे बढ़ाता है।


9. सुसमाचार से पहले कौन-सा गायन होता है?

सामान्य रविवार की पवित्र मिस्सा में प्रथम पाठ के बाद उत्तरदायी भजन गाया जाता है। दूसरे पाठ के बाद सुसमाचार उद्घोषणा (Gospel Acclamation) होती है।


सामान्यतः यह “अल्लेलूया” होता है। लेकिन चालीसा काल में इसके स्थान पर धर्मविधि में निर्धारित कोई अन्य उद्घोषणा की जाती है।


अल्लेलूया उत्तरदायी भजन नहीं है। यह मसीह का स्वागत करने वाली उद्घोषणा है, क्योंकि अब सुसमाचार में मसीह स्वयं अपने वचन के माध्यम से हमसे बात करने वाले हैं।


जब सुसमाचार से पहले केवल एक पाठ होता है, तो धर्मविधि की पुस्तकों में विभिन्न विकल्प दिए गए हैं। ये विकल्प धर्मविधिक काल के अनुसार भिन्न हो सकते हैं और इनमें उत्तरदायी भजन तथा अल्लेलूया या कोई अन्य निर्धारित सुसमाचार उद्घोषणा शामिल हो सकती है।


10. उत्तरदायी भजन में सहभागी होने का व्यावहारिक तरीका

अगली बार जब पवित्र मिस्सा में उत्तरदायी भजन शुरू हो, तो उसे केवल एक संगीत-अंतराल या अगले पाठ की तैयारी का समय न समझें।


उसकी प्रत्येक पंक्ति को पवित्र शास्त्र का वचन मानकर ध्यानपूर्वक सुनें और निर्धारित प्रत्युत्तर को पूरी सजगता के साथ गाएँ।


भजन का प्रत्युत्तर विश्वास की घोषणा, दया की याचना, धन्यवाद की अभिव्यक्ति या आशा का संदेश हो सकता है।


उसके शब्दों को अपनी व्यक्तिगत प्रार्थना बनने दें।


अगली बार जब पवित्र मिस्सा में उत्तरदायी भजन गाया जाए, तो याद रखें कि कलीसिया केवल दो पाठों के बीच की खाली जगह नहीं भर रही है। ईश्वर बोल चुके हैं और अब उनकी प्रजा पवित्र वचन से प्रेरित प्रार्थना के माध्यम से उन्हें उत्तर दे रही है।


यही उत्तरदायी भजन का वास्तविक महत्व है—ईश्वर के वचन को सुनना, उसे हृदय में ग्रहण करना और प्रार्थना के माध्यम से विश्वासपूर्वक उसका उत्तर देना।


कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर द्वारा

अनुवाद: सिस्टर एम. अल्फोंसा ग्रेशियन, एसआरए

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