- 09 August, 2026
वाराणसी, 9 अगस्त 2026: वाराणसी धर्मप्रांत ने 8 और 9 अगस्त को नव साधना कला केंद्र में दो दिवसीय युवा सम्मेलन के साथ राष्ट्रीय युवा रविवार मनाया। इस कार्यक्रम में धर्मप्रांत के विभिन्न पल्लियों से लगभग 150 युवाओं ने भाग लिया। प्रत्येक पल्ली से पाँच युवाओं ने इस कार्यक्रम में सहभागिता की। सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं को विश्वास में मजबूत करना, व्यक्तिगत विकास, सामुदायिक भावना और सामाजिक जागरूकता के लिए प्रेरित करना था।
इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय था— “साहस रखो, मैंने संसार को जीत लिया है” (योहन 16:33)। इस विषय के माध्यम से युवाओं को जीवन की विभिन्न चुनौतियों का सामना साहस, विश्वास और दृढ़ता के साथ करने के लिए प्रेरित किया गया।
पहला दिन: पहचान और व्यक्तिगत विकास की खोज कार्यक्रम के पहले दिन का मुख्य विषय “Magnifica Humanitas – एक महान मनुष्य बनना” था। यह सत्र “Becoming a Magnificent Human” पुस्तक से प्रेरित था, जो पोप लियो चौदहवें से जुड़े चिंतन पर आधारित है।
दिल्ली से आए अपरना बाबू और पर्सिवल होल्ट ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया। उन्होंने युवाओं को संवादात्मक चर्चाओं और गतिविधियों के माध्यम से अपने जीवन और व्यक्तित्व को समझने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं को कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों पर चिंतन करने के लिए आमंत्रित किया गया, जैसे— “मैं कौन हूँ?”, “मेरी पहचान का प्रमाण क्या है?” और “सफलता के बाद लोग मुझे किस रूप में पहचानेंगे ?”
बीज के उदाहरण के माध्यम से संसाधन व्यक्तियों ने युवाओं को उनकी मूल पहचान और जीवन के मूल्यों के महत्व को समझाया। बीज का भ्रूण (Embryo) मूल मूल्यों का प्रतीक था, एंडोस्पर्म (Endosperm) प्रतिभाओं और क्षमताओं का तथा बीज का आवरण (Seed Coat) जीवन के अनुभवों का प्रतीक बताया गया।
एक अन्य सत्र “Cultivating Your Inner Ring – अपने आंतरिक आधार को विकसित करना” में पेड़ के तने के उदाहरण द्वारा व्यक्तिगत विकास के तीन महत्वपूर्ण आयामों— आत्म-जागरूकता, आत्म-करुणा और ईमानदारी/अखंडता—को समझाया गया। इस सत्र का मुख्य संदेश था— “खोखले तने पर मजबूत छत्र विकसित नहीं किया जा सकता।” इसके माध्यम से युवाओं को यह समझाया गया कि दूसरों तक पहुँचने और समाज में प्रभाव डालने से पहले अपने भीतर एक मजबूत आधार विकसित करना आवश्यक है।
परिवार और समुदाय के संबंधों को मजबूत करना
कार्यक्रम में पारिवारिक संबंधों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। “Navigating Knots,” “Bearing the Weight” और “Honouring the Root” जैसे विषयों के माध्यम से युवाओं ने परिवार में आने वाली कठिनाइयों और चुनौतियों पर चिंतन किया।
युवाओं को यह समझने के लिए प्रेरित किया गया कि पारिवारिक समस्याओं का सामना धैर्य, समझदारी, जिम्मेदारी और प्रेम के साथ कैसे किया जा सकता है।
Vision Board Activity के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने व्यक्तिगत संकल्पों और भविष्य के लक्ष्यों की पहचान की। उन्होंने इस बात पर चिंतन किया कि वे किस प्रकार दूसरों के प्रति अनुग्रह और प्रेम दिखा सकते हैं, अपनी जड़ों को मजबूत कर सकते हैं, परिवार के सदस्यों का सहयोग कर सकते हैं तथा अपने वचन, व्यवहार और प्रेम के माध्यम से दूसरों के लिए उदाहरण बन सकते हैं।
युवाओं को मित्रों, साथियों, सहकर्मियों और पूरे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिए भी प्रेरित किया गया। वन (Forest) के उदाहरण के माध्यम से यह समझाया गया कि व्यक्ति को अपनी जड़ों से और जीवन के अंतिम स्रोत से जुड़े रहना आवश्यक है। इस संदर्भ में सूर्य, मिट्टी और हवा को जीवन के महत्वपूर्ण आधारों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
पहले दिन का समापन Taize Prayer और पापस्वीकार संस्कार के साथ हुआ। इससे युवाओं को शांति, मौन, प्रार्थना और आध्यात्मिक नवीनीकरण का अवसर मिला।
पवित्र यूखरिस्त और युवा संसद
कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत प्रातःकालीन प्रार्थना और पवित्र यूखरिस्त के साथ हुई। वाराणसी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष यूजीन जोसेफ ने पवित्र यूखरिस्त का मुख्य समारोह संपन्न किया।
दूसरे दिन का एक प्रमुख आकर्षण युवा संसद (Youth Parliament) रहा। इस मंच ने युवाओं को भारत के समक्ष उपस्थित विभिन्न महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान किया।
युवाओं ने भ्रष्टाचार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) से संबंधित चिंताएँ, महिला Shivratri, महिला शिक्षा, घरेलू हिंसा, स्वास्थ्य सेवा और यौन शिक्षा जैसे विषयों पर चर्चा और बहस में भाग लिया।
युवा संसद के माध्यम से प्रतिभागियों को आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने, अपने विचारों को जिम्मेदारी के साथ व्यक्त करने और सामाजिक चुनौतियों के समाधान में युवा नागरिकों की भूमिका को समझने के लिए प्रेरित किया गया।
Communio पर विशेष सत्र कार्यक्रम में Communio India पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसका संचालन बेंगलुरु से आईं सिस्टर मार्गरीटा ने किया।
इस सत्र में प्रतिभागियों को सामुदायिक एकता, सहयोग और सामाजिक सहभागिता के महत्व से परिचित कराया गया। युवाओं को चर्च और समाज के प्रति सक्रिय योगदान देने तथा मिल-जुलकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
दो दिवसीय इस युवा सम्मेलन ने वाराणसी धर्मप्रांत के युवाओं को अपने विश्वास को गहरा करने, स्वयं को बेहतर ढंग से समझने, पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों को मजबूत करने तथा समकालीन सामाजिक मुद्दों पर विचार करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम के समापन पर योहन 16:33 का संदेश— “साहस रखो, मैंने संसार को जीत लिया है”—पूरे सम्मेलन का केंद्रीय संदेश बना रहा। इस संदेश ने युवाओं को साहस, विश्वास, ईमानदारी और सेवा की भावना के साथ जीवन जीने तथा चर्च और समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
By Catholic Connect Reporter
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