- 09 August, 2026
नई दिल्ली, 4 अगस्त 2026: नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत में सरकारी स्कूलों की संख्या एक दशक पहले की तुलना में लगभग 94,000 कम हो गई है। यह गिरावट ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब देश में निजी स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एनहांसमेंट' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट 2014-15 से 2024-25 तक के यूडीआईएसई+ के आंकड़ों पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी स्कूलों की संख्या 2014-15 में 11.07 लाख थी, जो 2024-25 में घटकर 10.13 लाख रह गई।
यह कमी देश के समग्र स्कूली बुनियादी ढांचे में आए संकुचन के बीच दर्ज की गई है। भारत में कुल स्कूलों की संख्या 2014-15 में 15.16 लाख थी, जो 2017-18 में बढ़कर 15.58 लाख के उच्चतम स्तर पर पहुंची। इसके बाद यह संख्या घटकर 2024-25 में 14.71 लाख रह गई।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी को शिक्षा तक पहुंच में कमी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नीति आयोग के अनुसार, इसके पीछे मुख्य कारण स्कूलों का समेकन है, जिसके अंतर्गत स्कूलों का युक्तिकरण, कम नामांकन वाले विद्यालयों का विलय तथा समग्र शिक्षा जैसी योजनाओं के माध्यम से संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन नीतिगत उपायों का उद्देश्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, दक्षता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।
देश के कुल विद्यालयों में सरकारी स्कूलों की हिस्सेदारी अब भी दो-तिहाई से अधिक है। हालांकि, इसी अवधि में निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों की संख्या लगातार बढ़ी है। इनकी संख्या 2014-15 में 2.88 लाख थी, जो 2024-25 में बढ़कर 3.39 लाख हो गई।
वहीं, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है। 'अन्य' श्रेणी में मदरसे तथा धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा संचालित विद्यालय शामिल हैं, जिनकी कुल संख्या में हिस्सेदारी सीमित है।
मई 2026 में प्रकाशित इस रिपोर्ट में भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में पिछले एक दशक के दौरान हुए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट का केंद्रबिंदु शिक्षा तक पहुंच, समानता और गुणवत्ता है। इसके निष्कर्ष सरकारी विद्यालयों के समेकन, शिक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव तथा निजी विद्यालयों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हैं।
— कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर
अनुवाद : शिवराज बारा
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