- 25 August, 2026
सिलीगुड़ी, 25 अगस्त 2026: हंसक्वा क्षेत्र के चार प्रवासी मजदूरों को मालदा पुलिस ने 24 अगस्त को सुरक्षित मुक्त कराया। आरोप है कि मजदूरी के भुगतान को लेकर हुए विवाद के बाद एक एजेंट ने उन्हें चार दिनों तक उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाकर रखा था।
रोजगार की तलाश में ये मजदूर हरियाणा गए थे, जहां उन्हें नियमित वेतन, भोजन और रहने की सुविधा देने का कथित रूप से आश्वासन दिया गया था। उनकी पहचान हंसक्वा के बराइजोटे निवासी लेपारू मिंज और सुबेन टोप्पो, मुन्नी पक्का लाइन निवासी मुगडो टोप्पो तथा नीचे डांगी निवासी राजेश लकड़ा के रूप में हुई है।
परिजनों के अनुसार, चारों मजदूर 13 मई को रोजगार की तलाश में स्थानीय एजेंट उपेन बर्मन के माध्यम से हरियाणा गए थे। बर्मन ने उन्हें रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया था। बाद में उन्हें मालदा के एक अन्य एजेंट के हवाले कर दिया गया, जो उन्हें हरियाणा के पानीपत ले गया। वहां उन्हें ₹10,000 मासिक वेतन के साथ भोजन और रहने की सुविधा देने का वादा किया गया था।
मजदूरों ने 15 मई से काम शुरू किया। हालांकि, उनका आरोप है कि अगले तीन महीनों तक उन्हें वादा किया गया वेतन नहीं दिया गया और उन्हें केवल ₹500 प्रति माह जेब खर्च के रूप में दिए गए।
वेतन का भुगतान नहीं होने पर उन्होंने काम जारी रखने से इनकार कर दिया और बकाया राशि मांगने के लिए मालदा लौट आए। आरोप है कि 21 से 24 अगस्त के बीच एजेंट ने उन्हें एक स्थान पर बंधक बनाकर रखा और किसी से संपर्क करने से मना किया। एजेंट ने कथित रूप से उनसे ₹2,24,221 की मांग की और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।
इसी दौरान एक मजदूर किसी तरह संदेश भेजने और अपनी लोकेशन साझा करने में सफल रहा। इससे पुलिस को उनकी स्थिति का पता लगाने में मदद मिली और मालदा पुलिस ने 24 अगस्त की शाम चारों मजदूरों को सुरक्षित मुक्त करा लिया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवारों ने बागडोगरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई और बागडोगरा पुलिस ने मालदा पुलिस के साथ समन्वय कर चारों मजदूरों को मुक्त कराने की कार्रवाई की। स्थानीय एजेंट उपेन बर्मन को गिरफ्तार कर लिया गया।
बचाए गए मजदूरों को उनके परिजनों के पहुंचने तक पुलिस सुरक्षा में रखा गया। तीन पुलिसकर्मी एक रिश्तेदार के साथ रातभर यात्रा कर चारों मजदूरों को मालदा से वापस लाए। वे 25 अगस्त की सुबह लगभग 5 बजे बागडोगरा पुलिस स्टेशन पहुंचे।
बाद में उसी सुबह सिस्टर टेरेसा दोर्जी, SCSC, एक रिश्तेदार के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचीं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद चारों मजदूरों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया।
उपेन बर्मन को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत में पेश किया गया। बागडोगरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी ने आश्वासन दिया कि मामले में जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना चाय-बागान समुदायों से आने वाले प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। ऐसे मजदूर अक्सर दूर-दराज के राज्यों में रोजगार पाने के लिए बिचौलियों और एजेंटों पर निर्भर रहते हैं। यह मामला मजदूरी के शोषण, कथित अवैध रूप से बंधक बनाए जाने और मानव तस्करी जैसे गंभीर जोखिमों को उजागर करता है, जिनका सामना पर्याप्त जानकारी और सुरक्षा उपायों के बिना प्रवास करने वाले मजदूरों को करना पड़ सकता है।
इस सफल बचाव अभियान में मजदूरों, उनके परिवारों तथा बागडोगरा और मालदा पुलिस प्रशासन के बीच सहयोग महत्वपूर्ण रहा। चारों मजदूर अब सुरक्षित रूप से अपने परिवारों के पास लौट चुके हैं।
घटना के बाद प्रवासी मजदूरों के बीच रोजगार एजेंटों, वेतन और काम की परिस्थितियों के संबंध में अधिक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। साथ ही, संभावित शोषण की घटनाओं की समय पर सूचना देने तथा समुदायों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी सामने आई है।
रिपोर्ट: सिस्टर टेरेसा दोर्जी, SCSC
अनुवाद : शिवराज बारा
© 2026 CATHOLIC CONNECT POWERED BY ATCONLINE LLP