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बिहार में ईसाइयों को धर्म छोड़ने और गांव से निकालने की धमकी

भागलपुर, 12 अगस्त 2026: बिहार के भागलपुर जिले के गोपालपुर गांव में ईसाइयों को कथित रूप से 8 अगस्त को धमकी दी गई कि यदि वे ईसाई धर्म त्यागकर हिंदू धर्म में वापस नहीं लौटते हैं, तो उन्हें गांव छोड़ने के लिए मजबूर किया जाएगा।


बताया गया है कि गांव में एक ऑटोरिक्शा पर लगे लाउडस्पीकर के माध्यम से सार्वजनिक घोषणा कर ये धमकियां दी गईं। इस घटना को लेकर चर्च और मानवाधिकार संगठनों ने क्षेत्र में ईसाइयों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता व्यक्त की है।


जेसुइट पुरोहित और मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर सेड्रिक प्रकाश ने कथित धमकियों की निंदा करते हुए कहा कि ये भारतीय नागरिकों को अपने धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।


फादर प्रकाश ने कैथोलिक कनेक्ट से कहा, “सबसे पहले, हम एक धर्मनिरपेक्ष देश के नागरिक हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी व्यक्ति या समूह को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन व्यक्ति किस धर्म की उपासना या आस्था का पालन करे।


उन्होंने कहा कि ईसाइयों को अपना धर्म छोड़ने या अपने घरों से चले जाने के लिए मजबूर करना संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों और मानव गरिमा के विरुद्ध है।


उन्होंने कहा, “यह संवैधानिक रूप से गलत है। यह अनैतिक है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता तथा न ही लिया जाना चाहिए।”


फादर प्रकाश ने भागलपुर जिला प्रशासन और बिहार सरकार से तत्काल कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने अधिकारियों से उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि गोपालपुर के ईसाई बिना किसी डर या दबाव के शांतिपूर्वक रह सकें और अपने धर्म का पालन कर सकें।


उन्होंने हाल के वर्षों में ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति बढ़ती कथित शत्रुता पर भी चिंता व्यक्त की।


उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में, विशेष रूप से पिछले चुनाव के बाद, ईसाइयों और अल्पसंख्यकों, जिनमें मुसलमान भी शामिल हैं, के खिलाफ हमले बहुत अधिक बढ़ गए हैं।”


फादर प्रकाश ने बिहार में जेसुइट मिशनों की लंबे समय से चली आ रही उपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि चर्च कई दशकों से राज्य में सरकारी एजेंसियों के सहयोग से कार्य कर रहा है और विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बीच सेवा कर रहा है।


उन्होंने कहा, “हम मुख्य रूप से उन वंचित समुदायों के साथ काम कर रहे हैं, जिनके पास जाने के लिए कहीं और कोई सहारा नहीं है।” उन्होंने दलितों, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य वंचित समुदायों के बीच चर्च की सामाजिक सेवाओं का उल्लेख किया।


उन्होंने बिहार की अपनी हाल की यात्राओं को भी याद किया। इनमें पिछले चुनाव से कुछ समय पहले की गई यात्रा भी शामिल थी, जब उन्होंने चर्च के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लिया। उनके अनुसार, उन यात्राओं के दौरान यह चिंता भी सामने आई थी कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कुछ अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को शामिल नहीं किया गया, जिससे वे अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करने से वंचित हो सकते थे।


फादर प्रकाश ने कहा कि स्थानीय, जिला, राज्य और केंद्र—हर स्तर की सरकार की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करे।


उन्होंने कहा, “प्रशासन, चाहे वह स्थानीय, जिला, राज्य या केंद्र स्तर का हो, उसे संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के तहत प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।”


कैथोलिक कनेक्ट संवाददाता

अनुवाद : शिवराज बारा

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