- 25 June, 2026
23 जून 2026: सोमवार को संत पापा लियो XIV ने वेटिकन के "एस्टेटे रगात्सी" (Estate Ragazzi) समर कैंप का दौरा किया। उन्होंने शिविर में भाग लेने वाले बच्चों और युवाओं से मुलाकात की तथा उनके कई प्रश्नों के उत्तर दिए। इस वर्ष शिविर का विषय जूल्स वर्न की प्रसिद्ध पुस्तक “अराउंड द वर्ल्ड इन 80 डेज़” (80 दिनों में विश्व की यात्रा) पर आधारित है।
मानवीय संबंध सबसे महत्वपूर्ण हैं
"स्कूल के दिनों में मोबाइल के उपयोग को कम करने की कठिनाई" पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा:
"तकनीक बहुत अच्छी और कई कार्यों के लिए उपयोगी हो सकती है। लेकिन जब हम एक-दूसरे के साथ होते हैं, तो हर समय हमारे हाथ में मोबाइल, स्मार्टफोन या टैबलेट होना आवश्यक नहीं है।"
संत पापा ने बच्चों को प्रोत्साहित किया कि वे उपकरणों के माध्यम से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे के साथ समय बिताएँ।
उन्होंने कहा:
"मित्र बनाना, उनके साथ समय बिताना, उनके साथ खेलना और साथ में पढ़ाई करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। हम मानव हैं, और दूसरों के साथ प्रत्यक्ष संपर्क हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।"
परिवार के संदर्भ में भी उन्होंने कहा:
"जब परिवार एक साथ बैठता है, तो केवल अपने-अपने फोन में लगे रहना पर्याप्त नहीं है। बातचीत करना, एक-दूसरे को सुनना और साथ समय का आनंद लेना बहुत आवश्यक है।"
प्रार्थना और ईश्वर के साथ संबंध
पोप ने बच्चों को प्रार्थना का महत्व भी बताया।
उन्होंने कहा:
"भले ही हमारे फोन में बाइबल और प्रार्थनाएँ हों, लेकिन ईश्वर हमारे फोन को नहीं देखते। ईश्वर हमारे हृदय और हमारे जीवन को देखते हैं।"
डिजिटल निर्भरता के प्रति सावधान रहें
विशेष रूप से बड़े बच्चों से बात करते हुए पोप ने चेतावनी दी कि अनेक ऐप्स इस प्रकार बनाए जाते हैं कि लोग लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें।
उन्होंने कहा:
"वे हमें इस तकनीक का आदी बनाने की कोशिश करते हैं।"
उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चे फोन का प्रयोग सिर्फ निर्धारित समय के लिए करें, दिन में कुछ समय फोन को अलग रखकर अपने परिवार व मित्रों के साथ बातचीत करें और उनके साथ समय बिताएँ।
उन्होंने कहा:
"हम किसी तार से जुड़े हुए उपकरण नहीं हैं। हम इंसान हैं।"
संत पापा ने बच्चों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने मानवीय और आध्यात्मिक जीवन को विकसित करें, अच्छे संबंध बनाएँ, प्रार्थना में ईश्वर को खोजें और ऐसी किसी भी निर्भरता से बचें जो उनकी स्वतंत्रता को सीमित कर सकती है।
स्वयं सोचने की क्षमता विकसित करें
एक अन्य बच्चे ने पोप से उनके विश्व-भ्रमण के अनुभवों के बारे में पूछा।
संत पापा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई बार जीपीएस (GPS) ने उन्हें गलत रास्ते पर पहुँचा दिया।
उन्होंने कहा:
"इटली, अन्य यूरोपीय देशों, पेरू और यहाँ तक कि एक बार अमेरिका में भी मैंने जीपीएस का प्रयोग किया, और वह मुझे गलत रास्ते पर ले गया।"
इस अनुभव के आधार पर उन्होंने बच्चों को सलाह दी:
"जीवन में हमें स्वयं सोचने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि ईश्वर ने हमें बुद्धि और विवेक दिया है, इसलिए हमें केवल तकनीक पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
"यदि मेरा मस्तिष्क सही ढंग से काम कर रहा है, तो हर बात के लिए मुझे अपने फोन की आवश्यकता नहीं है।"
उन्होंने समझाया कि अच्छी तैयारी और सही निर्णय क्षमता हमें कठिन परिस्थितियों में मार्ग खोजने और समस्याओं का समाधान करने में सहायता करती है।
पोप के साथ प्रार्थना
कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने पोप लियो XIV को शिविर का "मुख्य अन्वेषक" (Chief Explorer) घोषित किया। उन्हें एक अन्वेषक किट और स्मृति-चिह्न भेंट किया गया।
अंत में पोप ने सभी बच्चों को अपने साथ प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि वे अपने माता-पिता को बताएँ कि उन्होंने संत पापा के साथ मिलकर प्रार्थना की है।
उन्होंने अपने संदेश का समापन इन शब्दों के साथ किया:
"प्रार्थना हमारे जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम चाहते हैं कि येसु हमारे बीच उपस्थित रहें।"
सौजन्य: वेटिकन न्यूज़
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