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एआई टूल्स प्रशिक्षण से युवाओं को डिजिटल मिशन के लिए किया जा रहा तैयार

इंदौर, 19 जून, 2026: डिजिटल दुनिया में कलीसिया की प्रभावी उपस्थिति को मजबूत करने और युवा संचारकों को नई तकनीकों से सशक्त बनाने की दिशा में इंदौर का सतप्रकाशन संचार केंद्र एक महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। 14 से 21 जून, 2026 तक चल रहे एक सप्ताह के एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल्स प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य भारत के विभिन्न डायसिस से आए 21 प्रतिभागियों को “डिजिटल दूत” के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।


सतप्रकाशन के इस मिशन का यह पाँचवाँ संस्करण है, जिसका उद्देश्य ऐसे कुशल डिजिटल संचारकों का नेटवर्क तैयार करना है जो सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देते हुए बदलते मीडिया परिदृश्य में प्रभावी संवाद स्थापित कर सकें।


कार्यक्रम की शुरुआत इंदौर के बिशप थॉमस मैथ्यू द्वारा पवित्र यूख्रिस्त के आयोजन के साथ हुई। अपने संदेश में उन्होंने प्रतिभागियों को डिजिटल दुनिया में मसीह का सच्चा गवाह बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक माध्यम और डिजिटल मंच विश्वास को साझा करने के लिए अनेक अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही उन्होंने तकनीक का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करते हुए सच्चाई, आशा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने का आह्वान किया।


प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक फादर डॉ. बाबू जोसेफ काराकोम्बिल एसवीडी ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि आज के समय में डिजिटल मीडिया समाज में परिवर्तन लाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा, “आपका कंटेंट न केवल आपको, बल्कि आपके समुदायों को भी रिप्रेजेंट करेगा। डिजिटल एंबेसडर के तौर पर, आपकी जिम्मेदारी है कि आप ऐसा सार्थक कंटेंट बनाएं जो ईसाई मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और सकारात्मक सामाजिक बदलाव को बढ़ावा दे।”


उन्होंने प्रतिभागियों को अपनी आस्था और परंपराओं से जुड़े रहते हुए रचनात्मकता और नवाचार को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।


सतप्रकाशन संचार केंद्र के निदेशक फादर सिरियक पीटर एसवीडी ने नई तकनीकों और संचार माध्यमों को सीखने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों पर साझा की जाने वाली हर सामग्री समाज को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाकर ऐसा कंटेंट तैयार करने का आग्रह किया जो शांति, सकारात्मकता और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा दे।


प्रशिक्षण कार्यक्रम में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों प्रकार के सत्र शामिल किए गए हैं। कैमरा प्रबंधन, छायांकन और वीडियोग्राफी पर आयोजित सत्र में फादर एंथनी स्वामी एसवीडी ने प्रतिभागियों को दृश्य कथावाचन, चित्र संयोजन और उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल सामग्री निर्माण की तकनीकों से परिचित कराया।


ग्राफिक डिजाइन और रचनात्मक सामग्री निर्माण पर केंद्रित सत्रों में प्रतिभागियों को कैनवा सहित विभिन्न एआई-सहायता प्राप्त डिजाइन उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी गई। इन सत्रों में यह समझाया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार रचनात्मकता को बढ़ाते हुए सामग्री निर्माण की प्रक्रिया को सरल बना सकता है।


पत्रकारिता और डिजिटल कथावाचन पर आयोजित सत्र में सिग्निस इंडिया के उपाध्यक्ष और लेखक सुमित धनराज ने प्रतिभागियों को पत्रकारिता लेखन, समाचार रिपोर्टिंग, फीचर लेखन और प्रभावी स्टोरीटेलिंग की बारीकियों से परिचित कराया। उन्होंने डिजिटल युग में सटीकता, नैतिकता और जिम्मेदार संचार के महत्व पर विशेष जोर दिया।


इसी क्रम में हरनीत सिंह ने एआई-पावर्ड कंटेंट क्रिएशन टूल्स पर सत्रों का संचालन किया। प्रतिभागियों को सामग्री निर्माण, संपादन, शोध, दृश्य डिजाइन और डिजिटल संचार में उपयोग होने वाली नई तकनीकों की जानकारी दी गई। उनके सत्रों में यह बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से प्रभावशाली और आकर्षक डिजिटल सामग्री कैसे तैयार की जा सकती है।


चल रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य युवा संचारकों को डिजिटल दुनिया में जिम्मेदार और प्रभावी नेतृत्व के लिए तैयार करना है। आस्था-आधारित मूल्यों और आधुनिक संचार तकनीकों के समन्वय के माध्यम से यह पहल ऐसे डिजिटल नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ डिजिटल मंचों पर सुसमाचार के संदेश को प्रभावी ढंग से साझा कर सकें।


तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया के बीच यह पहल कलीसिया के उस सतत प्रयास को दर्शाती है, जिसमें तकनीकी नवाचारों को अपनाते हुए सच्चाई, शांति, न्याय और मानवीय गरिमा के मूल्यों को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।


कैथोलिक कनेक्ट संवाददाता

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