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संत पापा कहते है: प्रेम से करें घृणा को नष्ट

वैटिकन, 25 जून, 2026: संत पापा लियो चौदहवे सभी विश्वासियों को आमंत्रित करते है कि वे प्रेम से घृणा को नष्ट कर प्रभु येशु के साथ गहरा संबंध बनाएं।


संत पापा लियो चौदहवे अपने सन्देश में सभी ख्रीस्तीयों से यह आहवान करते है की सभी प्रभु येसु के साथ अपना व्यक्तिगत संबंध को गहरा बनाये और प्रेम आशा व ढृढ़ता के साथ सुसमाचार के सच्चे साक्षी बने। सुसमाचार पर मनन करते हुऐ वे कहते है की प्रभु येसु जब अपने बारह शिष्यों को मिशन के लिए भेजते है तो संत पापा कहते है की सच्चे सुसमाचार प्रचार केवल रणनीतियों या तकनीकियों से नहीं बल्कि, प्रभु येसु के साथ व्यक्तिगत संबंध से पोषित होता है जिसे प्रार्थना शांति और चिंतन से सींचा जा सकता ह। प्रभु येसु के शब्दों में यदि कहे तो प्रभु कहते है '' जो मै तुमसे अंधकार में कहा उसे प्रकाश में कहो; और जो तुम फुसफुसाहट में सुनते हो उसे पुकार - पुकार कहो'' संत पापा लियो ने इसको उजागर किया कि व्यक्तिगत विश्वास और सार्वजनिक साक्षी दोनों आपस में जुड़े है इन दोनों में गहरा संबंध है। 


संत पापा कहते है कि प्रभु हमें स्मरण दिलाते है कि सुसमाचार कि घोषणा करने से पहले हमें प्रभु को व्यक्तिगत रूप से अनुभव करना है और उस अनुभव को साँझा करना है क्योंकि हम सभी का प्रभु येसु के साथ अनोखा और अलग -अलग है। क्योंकि हमारे मिशन कि शक्ति संसाधनों पर निर्भर नहीं करता बल्कि पवित्रात्मा के कार्यों और ईश्वरीय कृपा पर निर्भर करती है। 


संत थोमस एक्विनास कि शिक्षा पर प्रकाश डालते हुऐ संत पापा कहते है कि आदेश देने का अर्थ है कि जिस सत्य को हमने स्वयं में अनुभव किया है उसे दूसरों तक पहुँचए संत पापा इस पर जोर देकर कहते है कि चिंतन केवल संतों या समर्पित भाई - बहनों के लिए ही नहीं है बल्कि हर ख्रीस्तीय के लिए एक बुलाहट है, आगे वे सभी ख्रीस्तीयों को प्रोत्साहित करते हुऐ कहते है कि हमें अपने दैनिक जीवन में या क्रियाकलापों में कुछ समय मौन रहकर प्रभु कि आवाज को सुनना है और अपनी सभी चिंताओं या सुखद पलों को प्रभु के हाथों में सौपना है। 


संत पापा आगे कहते है कि सच्चा विश्वास और उसमे ढृढ़ता ख्रीस्तीयों को विश्वसनीय तथा स्वत्रन्त्र शिष्य बनाते है जो कि सुसमाचार के प्रकाश को प्रतिबिम्बित करता है। हमारे पुरखों या प्रथम ख्रीस्तीय समुदाय और आजकल के विश्वासियों द्वारा जो चुनौतियों का सामना करने के बारे में वे कहते है कि कठिनाईयां परेशानियों के बिच दुखी होना निराश होना वास्तविक है लेकिन वे कहते है उन क्षणों में प्रभु के प्रति उनकी शिक्षाओं के प्रति विश्वसनीय बने रहना प्रभु के वचन का प्रचार करना एक चुनौती है - इन चुनौतियों का सामना हम इस प्रकार कर सकते है - प्रेम से घृणा को नम्रता से अंधकार को और धैर्य से निराशा को नष्ट कर सुसमाचार के सच्चे अनुनायी सिद्ध हो सकते है।


अंत में संत पापा विश्वासियों को प्रोत्साहित करते हुऐ कहते है कि वे मसीह के साथ अपने संबंध को और गहरा करें विश्वास कि जड़ों को मजबूत बनाये और आशा प्रेम तथा शांति द्वारा उसे प्रतिदिन सिंचित करे।


Courtesy: Vatican News

Translator: Sr. M. Alphonsa Gratian SRA

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