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रांसामा में धर्मशिक्षकों ने अपनी बुलाहट और मिशन के प्रति प्रतिबद्धता को नवीनीकृत किया

रांसामा, छत्तीसगढ़, 10 सितंबर 2026: जशपुर जिले के रांसामा पल्ली में धर्मशिक्षकों और लोकधर्मी नेताओं के लिए आयोजित दो दिवसीय गठन सेमिनार में उनकी बुलाहट को और गहरा करने, आध्यात्मिक जीवन को मजबूत बनाने तथा कलीसियाई और पास्टोरल सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने पर विशेष जोर दिया गया।

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सेमिनार का संचालन साधना केंद्र, बिलासपुर में सेमिनरियों के आध्यात्मिक निदेशक फादर इग्नास एक्का ने किया। उन्होंने धर्मशिक्षकों की बुलाहट और उनकी जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्मशिक्षा को केवल एक जिम्मेदारी या कार्य के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे कलीसिया की सेवा के लिए एक बुलाहट के रूप में समझना चाहिए। धर्मशिक्षकों का कार्य लोगों को मसीह से मिलने और विश्वास में बढ़ने में सहायता करना है।


गठन कार्यक्रम में पवित्र यूखरिस्त को ख्रीस्तीय जीवन का स्रोत और शिखर बताया गया। फादर इग्नास ने धर्मशिक्षकों को अपने यूखरिस्तीय विश्वास को और गहरा करने तथा अपने व्यक्तिगत जीवन और पास्टोरल सेवा के लिए पवित्र यूखरिस्त से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।


द्वितीय वाटिकन महासभा की शिक्षाओं, विशेष रूप से Lumen Gentium और Ad Gentes, का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक बपतिस्मा प्राप्त ख्रीस्तीय अपने विश्वास की गवाही देने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि धर्मशिक्षकों की विशेष जिम्मेदारी है कि वे अपने जीवन, वचन और सेवा के माध्यम से मसीह के विश्वसनीय साक्षी बनें तथा ख्रीस्तीय समुदाय के निर्माण में योगदान दें।


Presbyterorum Ordinis का उल्लेख करते हुए फादर इग्नास ने कलीसिया के निर्माण और उसके मिशन को आगे बढ़ाने में पुरोहितों और लोकधर्मियों की पूरक भूमिकाओं पर भी प्रकाश डाला।


रायगढ़ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पॉल टोप्पो ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए वर्तमान परिस्थितियों में एक प्रामाणिक ख्रीस्तीय जीवन जीने के अर्थ पर चिंतन करने का आह्वान किया। उन्होंने धर्मशिक्षकों और लोकधर्मी नेताओं से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन, सुसमाचार के प्रति निष्ठा, पवित्र यूखरिस्त में सहभागिता और दूसरों की प्रेमपूर्ण सेवा के माध्यम से अपने विश्वास को प्रकट करें।


इस कार्यक्रम में गिनाबहार डीनरी और रांसामा पल्ली से धर्मशिक्षकों तथा लोकधर्मी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इससे सेमिनार को व्यापक पास्टोरल स्वरूप मिला और पल्ली के नेताओं, धर्मशिक्षकों तथा व्यापक ख्रीस्तीय समुदाय के बीच सहयोग को बढ़ावा मिला।


सेमिनार का आयोजन रांसामा के पल्ली पुरोहित फादर कंचन तिर्की ने पल्ली में सेवारत पुरोहितों के सहयोग से किया। कांग्रेगेशन ऑफ आवर लेडी ऑफ द गार्डन की सिस्टर मार्लिन और अन्य धर्मबहनों के साथ-साथ युवा नेताओं तथा पल्ली नेताओं ने कार्यक्रम के आयोजन और संचालन में सहयोग दिया।


यह सेमिनार पल्ली में लोकधर्मी नेतृत्व और धर्मशिक्षा सेवकाई को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे व्यापक गठन कार्यक्रमों की एक कड़ी था। इससे पहले सेंट अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची के प्रोफेसर फादर प्रफुल्ल बाड़ा ने ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम का संचालन किया था। इसका उद्देश्य लोकधर्मियों और पल्ली नेताओं की नेतृत्व क्षमता तथा प्रशिक्षण देने की क्षमता को बढ़ाना था।


लगातार आयोजित किए जा रहे इन गठन कार्यक्रमों ने रांसामा पल्ली और आसपास के समुदायों में धर्मशिक्षा सेवकाई को मजबूत करने, लोकधर्मी नेतृत्व को बढ़ावा देने और ख्रीस्तीय प्रतिबद्धता को गहरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


सेमिनार के समापन पर प्रतिभागियों ने अपने विश्वास को प्रामाणिक रूप से जीने, मसीह की गवाही देने तथा कलीसिया और समाज की अधिक समर्पण भावना के साथ सेवा करने की अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत किया।


— फादर प्रफुल्ल बाड़ा द्वारा

अनुवाद : शिवराज बारा

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