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ईसाई मजदूरों का आरोप: धार्मिक पहचान के कारण काम से रोका गया

कांकेर, छत्तीसगढ़, 12 जून 2026: छत्तीसगढ़ की आरी डोंगरी लौह अयस्क खदान में पिछले 15 साल से काम कर रहे आठ ईसाई मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें उनकी धार्मिक पहचान से जुड़े कारणों से काम पर लौटने से रोक दिया गया। उन्होंने इस मामले में जिला प्रशासन से मदद की मांग की है।


मजदूरों का कहना है कि 9 जून को खदान में काम देख रहे ठेकेदार के प्रतिनिधियों ने उन्हें मौखिक रूप से कहा कि वे अब काम पर न आएं। उनका आरोप है कि उन्हें कोई लिखित आदेश, नोटिस या कानूनी जानकारी नहीं दी गई।


यह खदान गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड के तहत संचालित होती है। वहीं, कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के कच्छे गांव स्थित खदान में टीएमसी मिनरल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड ठेकेदार के रूप में काम कर रही है।


प्रभावित मजदूरों का कहना है कि वे पिछले 15 साल से लगातार यहां काम कर रहे थे और उनके खिलाफ कभी कोई अनुशासनात्मक शिकायत या खराब सेवा रिकॉर्ड नहीं रहा।


मजदूरों के अनुसार, ठेकेदार के प्रतिनिधियों ने उनसे कहा:


"पहले गांव के लोगों से बात करो और अपने धार्मिक मुद्दे को उनके साथ सुलझाओ। उसके बाद काम पर वापस आना, कोई तुम्हें नहीं रोकेगा। अगर तुम उनकी बात नहीं मानोगे, तो तुम्हें आगे काम नहीं करने दिया जाएगा। जब तक तुम गांव के लोगों के साथ अपना धार्मिक मुद्दा नहीं सुलझाते, तब तक दोबारा मत आना।"


मजदूरों का आरोप है कि इस बात के बाद से उन्हें 9 जून से काम करने से रोक दिया गया।


इस घटना ने धर्म की स्वतंत्रता, कानून के सामने समानता, रोजगार में भेदभाव, आजीविका के अधिकार और नौकरी की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्हें काम से हटाने का संबंध उनके ईसाई धर्म से हो सकता है।


न्याय की मांग को लेकर मजदूर 11 जून को कांकेर पहुंचे और जिला कलेक्टर को एक लिखित आवेदन दिया। उन्होंने अपने रोजगार की बहाली, धार्मिक भेदभाव से सुरक्षा, पूरे मामले की जांच, किसी भी अवैध कार्रवाई के खिलाफ कदम उठाने और उनके संवैधानिक तथा श्रमिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।


आवेदन जमा करते समय जिला मसीह आस्था समाज, कांकेर के साइमन डिगबल टांडी और हाबिल मसीह भी उनके साथ मौजूद थे और उन्होंने मजदूरों को सहयोग दिया।


प्रोग्रेसिव क्रिश्चियन अलायंस ने मानवाधिकार संगठनों, श्रमिक अधिकार समूहों, धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थकों और सरकारी अधिकारियों से इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने, स्थिति पर नजर रखने और मजदूरों को जरूरी कानूनी तथा मानवाधिकार सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।


फिलहाल मजदूर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और उनकी चिंताओं का समाधान हो सके।


कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर द्वारा

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