- 08 May, 2026
मध्य प्रदेश, 8 मई, 2026: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी अल्पसंख्यक संस्थान द्वारा चुना गया उम्मीदवार योग्य है, तो राज्य सरकार उसके प्राचार्य चयन पर सवाल नहीं उठा सकती।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन चलाने का अधिकार प्राप्त है। इसमें संस्थानों के प्रमुखों की नियुक्ति अपनी सोच और प्राथमिकताओं के अनुसार करने की स्वतंत्रता भी शामिल है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कोई अल्पसंख्यक संस्थान किसी योग्य उम्मीदवार को चुनने का निर्णय लेता है, तो उस फैसले को “मेरिट” या “तर्कसंगतता” के आधार पर सरकार या अदालत द्वारा चुनौती नहीं दी जा सकती।
यह मामला मध्य प्रदेश के एक अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त कॉलेज से जुड़ा था। कॉलेज प्रबंधन ने पूर्व प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने के बाद एक शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया था। हालांकि, राज्य अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि सरकारी नियमों के अनुसार वरिष्ठतम शिक्षक को यह पद मिलना चाहिए।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी प्रशासनिक निर्देश अल्पसंख्यक संस्थानों को मिले संवैधानिक अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकते। अदालत ने कहा कि प्राचार्य और संस्थान प्रमुखों की नियुक्ति संस्थान के प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्णयों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें अल्पसंख्यक संस्थानों को अपनी पहचान, मूल्यों और उद्देश्य को बनाए रखने के लिए स्वायत्तता देने की बात कही गई थी। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी सहायता मिलने के बावजूद इन संस्थानों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहते हैं।
इस फैसले को देशभर के ईसाई और अन्य धर्म-आधारित शैक्षणिक संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्च संचालित संस्थान लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि प्राचार्यों और प्रशासकों की नियुक्ति की स्वतंत्रता उनके संस्थानों की धार्मिक और शैक्षणिक पहचान बनाए रखने के लिए जरूरी है।
ऐसे समय में, जब कई राज्यों में अल्पसंख्यक संस्थानों में बढ़ते सरकारी हस्तक्षेप को लेकर चिंता जताई जा रही है, यह फैसला उनकी स्वायत्तता और संवैधानिक सुरक्षा को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
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कैथोलिक कनेक्ट रिपोर्टर द्वारा
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